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गड्ढा ऐप बना दिखावा, हरिद्वार की सड़कें फिर हुईं गड्ढों के हवाले

 

हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेशभर की सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के उद्देश्य से कुछ वर्ष पूर्व “गड्ढा ऐप” की शुरुआत की थी। इस ऐप के माध्यम से आम नागरिक सड़क पर मौजूद गड्ढों की सूचना सीधे संबंधित विभाग तक पहुंचा सकते थे। योजना की शुरुआत के समय ऐसा प्रतीत हो रहा था कि धर्मनगरी हरिद्वार सहित पूरे प्रदेश की सड़कें जल्द ही गड्ढा मुक्त हो जाएंगी। अधिकारियों ने भी शुरुआती दौर में शिकायतों पर तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की, लेकिन समय बीतने के साथ यह अभियान और ऐप दोनों ही सरकारी फाइलों तक सीमित होकर रह गए।

वर्तमान स्थिति यह है कि हरिद्वार शहर के कई मुख्य और व्यस्त मार्ग बड़े-बड़े गड्ढों से भरे पड़े हैं। बरसात से पहले ही सड़कों की हालत बदतर हो चुकी है। रोजाना हजारों वाहन इन मार्गों से गुजरते हैं, लेकिन सड़क सुरक्षा को लेकर संबंधित विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार वाहन चालक गड्ढों में गिरकर चोटिल हो जाते हैं या उनका संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। खासकर रात के समय और बारिश के दौरान यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।

नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि गड्ढा ऐप को केवल औपचारिकता बनाकर न रखा जाए, बल्कि प्राप्त शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही शहर की प्रमुख सड़कों का तत्काल सर्वे कर गड्ढों को भरने का अभियान चलाया जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके और लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

प्रेमनगर आश्रम चौक के निकट ओर पुल पर ही गड्ढो की चौड़ाई इतनी है कि दो पहिया वाहन पर बैठे लोगों को गिरने का खतरा बना रहता है, ऋषिकुल के सामने सड़क इस तरह धसी है कि देखने पर पता नही चलता जब पहिया गड्ढे में जाता है तो दुपहिया वाहन चालक कई बार नियंत्रण खो देते है। कनखल में दादूबाग पुलिया से बाबा रामदेव के आश्रम के सामने से घराट तक सड़क का बुरा हाल है। ज्वालापुर में भी कई स्थानों पर मुख्य मार्ग पर स्पीड ब्रेकर के साथ साथ गड्ढे भी स्पीड कम करने में यातायात व्यस्था में अपना सहयोग प्रदान कर रहे है।

अब सवाल यह है कि जिस गड्ढा ऐप को सड़कों की बदहाली दूर करने के लिए बनाया गया था, क्या वह केवल एक सरकारी घोषणा बनकर रह गया है या फिर प्रशासन इसे दोबारा सक्रिय कर हरिद्वार को वास्तव में गड्ढा मुक्त बनाने की दिशा में कदम उठाएगा।  हालांकि जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने संबंधित विभागों को बरसात से पूर्व सड़क बनाने, नाला सफ़ाई, गड्ढे भरने के निर्देश दिए। देखना होगा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गड्डामुक्त प्रदेश कब निर्देशो का कब तक पालन होता है। 

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