उत्तराखंड हरिद्वार

धर्मनगरी में नशे के बढ़ते कदम

नशे के विरुद्ध चलाई जाने वाली चौपाल हुई बंद

अंग्रेजों के समय बने कानून में भी हरिद्वार नशा प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित

हरिद्वार ।

धर्मनगरी के रूप में प्रसिद्ध हरिद्वार किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ, मांस, मदिरा और वेश्यावृत्ति से मुक्त घोषित क्षेत्र है। बावजूद इसके वर्तमान समय में नशा शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। अवैध रूप से नशे का कारोबार करने वाले असामाजिक तत्व राजनीतिक संरक्षण के चलते युवाओं को आसानी से अपना शिकार बना रहे हैं। खासतौर पर शराब और सूखे नशे की लत युवाओं को कम उम्र में ही बर्बादी की ओर धकेल रही है।

नशा मुक्त क्षेत्र बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के दौरान अवैध नशे की तस्करी करने वालों को गिरफ्तार भी किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध नशे का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं युवा वर्ग तेजी से नशे की गिरफ्त में आता दिखाई दे रहा है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार जिले में नशे के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। अवैध कारोबार करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। स्कूलों और कॉलेजों में पुलिस तथा सामाजिक संस्थाओं की मदद से नशा विरोधी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय पुलिस अधिकारियों द्वारा चौपाल कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

इन अभियानों का असर कई गांवों में देखने को मिला है। ग्रामीणों ने न केवल जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना की, बल्कि नशा करने वालों को नशा छोड़ने या गांव छोड़ने तक की चेतावनी दी है।

गौरतलब है कि अंग्रेजों द्वारा वर्ष 1916 में बनाए गए कानून के अनुसार हरिद्वार और उसके आसपास के पांच किलोमीटर क्षेत्र को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया था। इस कानून के तहत मांस, शराब और अन्य नशीले पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन वर्तमान समय में इन नियमों को दरकिनार कर क्षेत्र में अवैध रूप से नशे की तस्करी की जा रही है, जो प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।

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