अब एक बार फिर छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े मामले में 19 कॉलेजों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद यह बहुचर्चित प्रकरण फिर सुर्खियों में आ गया है।
हरिद्वार।
जिले में एक और बड़ा छात्रवृति घोटाला सामने आया है। जिसमें जिले 19 इंटर कालेजों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों के खिलाफ सिडकुल थाने ने एफआईआर दर्ज की गई है। जिला समाज कल्याण विभाग द्वारा विभागीय जांच के बाद गबन और धोखाधड़ी की पुष्टि होने के बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी की ओर से दिए तहरीर पर ये मुकदमा दर्ज हुआ है। जिसके बाद तमाम शिक्षण संस्थानों में हड़कंप मचा हुआ है। इन शिक्षण संस्थानों पर केंद्र सरकार की ओर से अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति को हड़पने के लिए फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी करने का आरोप है। मामले की गहन जांच के लिए एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने तीन सदस्यों वाली एसआईटी का गठन कर दिया है।
उत्तराखंड में छात्रवृत्ति घोटाला पहली बार वर्ष 2017 में बड़े स्तर पर सामने आया, जब वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ। जांच में आरोप लगे कि हरिद्वार और देहरादून सहित कई निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी या अपात्र छात्रों के नाम पर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति हासिल की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले विभागीय जांच कराई और बाद में एसआईटी (SIT) से जांच कराई। वर्ष 2018 में हरिद्वार के सिडकुल थाने में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद कई संस्थानों और अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आई।
आगे चलकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की। हाल के वर्षों में ED ने इस मामले में कई आरोपपत्र दाखिल किए हैं और 2026 में लगभग 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच करने की कार्रवाई भी की।

















































