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दिल्ली, लखनऊ की घटना के बाद भी कुम्भकरणी नींद में विभाग

हरिद्वार। दिल्ली के होटल में आगजनी की घटना के बाद भी धर्मनगरी में सरकारी विभाग सक्रिय नहीं हो पाए। शहर के सबसे व्यस्त्तम शिवमूर्ति क्षेत्र में सबसे अधिक अवैध निर्माण और अनियंत्रित व्यवसाईकरण का मुख्य अडडा बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हरिद्वार रूड़की विकास प्रधिकरण और जिला प्रशासन की नाक के नीचे रातो रात रिहायशी घरों को होटल और लॉज में परिवर्तित किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध खेल पर विभाग और प्रशासन मूकदर्शक बने बैठे हैं। श्रवणनाथ नगर, रेलवे स्टेशन के सामने सराय, हिमालयन ड़िपो की गली आदि में लगभग 90 प्रतिशत मकानों का व्यवसायीकरण कर उन्हें होटल रूपी बनाया जा चुका है। छोटे -छोटे घरों में जहां रास्ता भी कई जगह संकरा है गलियों के अन्दर भी बहुमंजिला होटलो का निर्माण किया गया हैं। इन होटलो के न तो नक्शे पास कराए गये है न ही होटल निर्माण के दौरान सैटबैक छोड़ी गई है। सुरक्षा की दृष्टि से होटल या लॉज का निर्माण कम से कम 9 मीटर चौडी रोड़ पर होना चाहिए, जहां अग्निशमन की गाड़ियां आराम से जा सके, ना ही अग्निशमन विभाग से कोई एनओसी ली गई, ना ही आपातकालीन निकास की व्यवस्था की गई, जिससे भविष्य में बड़े हादसे की आशंका बनी रहती हैं। स्थानीय जनता का सीधा आरोप है कि यह सब संबंधित विभागों की मिली भगत और लापरवाही के कारण हो रहा है। प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माण के शुरूआत में कोई कार्रवाई नही की जाती है बाद में जब निर्माण पूरा होता है तो नोटिस भर कार्रवाई की जाती है। जो फाइलों में बद हो जाती हैं।

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