नैनीताल। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने बुधवार को नैनीताल जनपद स्थित हिमालयन आश्रम, सतखोल में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने ध्यान सत्र में सहभागिता की तथा आश्रम द्वारा संचालित विभिन्न आध्यात्मिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि सदियों से आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और मानव कल्याण की परंपरा की वाहक रही है। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल पर्वतों का समूह नहीं, बल्कि ऐसी चेतना का प्रतीक है, जो व्यक्ति को आत्म-अन्वेषण और आंतरिक यात्रा के लिए प्रेरित करता है।
राज्यपाल ने कहा कि हिमालयन आश्रम, सतखोल न केवल ध्यान और आध्यात्मिक साधना का केंद्र है, बल्कि समाज के समग्र विकास के लिए भी प्रेरणादायी कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति अनेक जिम्मेदारियों, चुनौतियों और व्यस्तताओं से घिरा हुआ है। ऐसे समय में ध्यान व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने, मानसिक संतुलन स्थापित करने और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।
राज्यपाल ने कहा कि जब व्यक्ति का मन शांत और संतुलित होता है, तभी वह परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकता है।
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें पूर्व में हैदराबाद स्थित हार्टफुलनेस के वैश्विक केंद्र के भ्रमण का अवसर प्राप्त हुआ था, जहां उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि किस प्रकार ध्यान, आत्मिक विकास और मानवीय मूल्यों के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता किसी एक स्थान, समुदाय या परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति की सार्वभौमिक आवश्यकता है।
राज्यपाल ने सतखोल के प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि यह स्थान व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने आश्रम द्वारा बच्चों के लिए संचालित ‘ब्राइटर माइंड्स’ कार्यक्रम तथा किसानों के लिए सुगंधित एवं औषधीय पौधों के संवर्धन संबंधी प्रयासों की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का भविष्य बच्चों की प्रतिभा और किसानों की समृद्धि पर आधारित होता है तथा इन दोनों क्षेत्रों में किया गया निवेश राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करता है।
राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के इस युग में भौतिक प्रगति के साथ-साथ मानसिक संतुलन, आत्मानुशासन और आंतरिक शांति का महत्व और अधिक बढ़ गया है। उत्तराखंड के विकास में आधुनिकता और परंपरा, विकास और पर्यावरण तथा भौतिक उन्नति और आध्यात्मिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने हिमालयन आश्रम, सतखोल द्वारा किए जा रहे आध्यात्मिक एवं जनहितकारी कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि आश्रम भविष्य में भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, आश्रम के साधक-साधिकाएं, सामाजिक कार्यकर्ता तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।













































