एक तरफ धर्म रक्षा कि तारीफ मे पढ़े जा रहे थे कसिदे, दूसरी और धर्म नगरी मे अवैध शराब् फिसली
जनता जागी, आबकारी विभाग सोया।
हरिद्वार। इन दिनों हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं जहां करोड़ों कांवड़िये आस्था लेकर पहुंच रहे हैं वहीं दूसरी ओर शराब माफिया भी बेखौफ होकर अपना खेल खेलने में जुटे हैं
ताजा मामला हरिद्वार के दुर्गा चौक का है जहां पर एक शराब माफिया टूटी हुई नंबर प्लेट वाली स्कूटी के सहारे शराब सप्लाई कर रहा था लेकिन उसे बेचारे की किस्मत धोखा दे गई और वह फिसल कर सड़क पर जा गिरा सड़क पर गिरते ही शराब के पैकेट और बियर ताश के पत्तों की तरह बिखर गए फिर क्या था देखते ही देखते भीड़ मौके पर जुट गई लेकिन जैसे ही मीडिया पहुंची ओर कैमरे खुले तुरंत पुलिस हरकत में आई और उस बिखरी हुई शराब को समेट कर स्कुटी सहित ज्वालापुर कोतवाली ले गई अब सवाल यह है कि जब धर्मनगर हरिद्वार में चप्पे छपे पर पुलिस तैनात है तो यह शराब माफिया इस अवैध शराब की तस्करी कैसे कर पा रहे।
सवाल आबकारी विभाग से भी है। आखिर यह विभाग करता क्या है? जब आम जनता शराब तस्कर को पकड़कर पुलिस के हवाले करती है , तो फिर आबकारी विभाग की मौजूदगी सिर्फ फाइलों तक ही क्यों दिखाई देती है?
हर बार एक-दो लोगों को पकड़कर कार्रवाई का ढोल पीट दिया जाता है, लेकिन कभी उस असली चेहरे तक पहुंचने की कोशिश नहीं होती जो इस पूरे धंधे का संचालक है। अगर बरामद शराब की बोतलों पर दर्ज बैच नंबर और अन्य विवरण से सप्लाई की कड़ी का पता लगाया जा सकता है, तो फिर उस दिशा में जांच क्यों नहीं बढ़ती? आखिर इतने बडे पैमाने पर यह शराब कहां से आई और किसके संरक्षण में यहां तक पहुंची
धर्मनगरी में आस्था का मेला लगा है, लेकिन शराब माफिया के हौसले भी कम नहीं हैं। सवाल यह है कि क्या आबकारी विभाग सिर्फ घटनाओं के बाद कागजी कार्रवाई करने के लिए है, या फिर अवैध शराब के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए भी कोई कदम उठा पाएगी, हालांकि आबकारी विभाग ने इस घटना के बाद दलहन होगा विभाग धार्मिक नगरी मे कितना कंट्रोल कर पायेगा।



















































