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सेवानिवृत्ति से पहले बढ़ी चर्चाएं, CCI के जुर्माना मामले में फिर उठे जवाबदेही के सवाल

 

देहरादून। कम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) द्वारा उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड (UAPBM) पर वर्ष 2016 की आबकारी नीति और विदेशी मदिरा (IMFL) खरीद व्यवस्था से जुड़े मामले में ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाए जाने के बाद प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर उस समय की निर्णय प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका चर्चा का विषय बन गई है।

सूत्रों के मुताबिक, इस प्रकरण से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी 30 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसी बीच प्रशासनिक गलियारों में उनके संभावित सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

उल्लेखनीय है कि CCI ने अपने आदेश में विदेशी मदिरा खरीद व्यवस्था में प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों और प्रक्रिया में अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए UAPBM पर ₹1 करोड़ का आर्थिक दंड लगाया था। यह मामला पूर्व में उत्तराखंड हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है।

अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि CCI के आदेश के कारण सरकारी बोर्ड पर आर्थिक दंड लगाया गया है, तो उस समय निर्णय लेने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी या नहीं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि शासन यदि आदेश का विधिक और प्रशासनिक परीक्षण करता है, तो संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा जा सकता है।

विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि जिन अधिकारियों का नाम इस पूरे विवाद से जुड़ा रहा है, उनके सेवा विस्तार पर कोई भी निर्णय लेने से पहले मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना सेवा विस्तार देना पारदर्शी प्रशासन की भावना के अनुरूप नहीं होगा।

फिलहाल शासन की ओर से न तो सेवा विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने आया है और न ही किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय किए जाने संबंधी आदेश जारी हुआ है। ऐसे में अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम और CCI के आदेश के बाद संभावित प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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