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फायर NOC नहीं, सुरक्षा मानक अधूरे… आखिर किसके भरोसे 60 छात्रों की जान ?

फायर NOC नहीं, सुरक्षा मानक अधूरे… फिर भी बेखौफ चल रही क्लासेज! आखिर किसके भरोसे 60 छात्रों की जान?
सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद अग्निशमन विभाग की जांच में सामने आईं कमियां, नोटिस देकर थमा दिया मामला… अब कार्रवाई पर उठ रहे हैं बड़े सवाल।
हरिद्वार। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत के बाद अग्निशमन विभाग द्वारा की गई जांच में उड़ान इंस्टीट्यूट, विष्णुगार्डन, कनखल सहित कई कोचिंग संस्थानों की फायर सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई, जिसमें उड़ान इंस्टीट्यूट के पास फायर NOC नहीं पाई गई और सुरक्षा मानकों में भी कमियां दर्ज की गईं। इसके बावजूद अब तक केवल नोटिस देकर मामला शांत कर दिया गया है।
अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि उड़ान इंस्टीट्यूट में लगभग 60 छात्र अध्ययनरत हैं, लेकिन संस्थान के पास फायर NOC नहीं है। रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्थाओं में कमियों का जिक्र करते हुए उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विभाग स्वयं मान रहा है कि सुरक्षा मानक पूरे नहीं हैं, तो फिर संस्थान के खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या नियम केवल कागजों तक सीमित हैं? क्या छात्रों की सुरक्षा से बड़ा भी कोई हित है?
अगर दुर्भाग्यवश किसी दिन आग लगने जैसी घटना हो जाए तो क्या उन दो सीढ़ियों के सहारे दर्जनों छात्र सुरक्षित बाहर निकल पाएंगे? क्या अग्निशमन विभाग ने कभी इसका व्यावहारिक आकलन किया? किसी हादसे के बाद जिम्मेदारी कौन लेगा—कोचिंग संचालक, अग्निशमन विभाग या फिर प्रशासन?
दिल्ली के मुखर्जी नगर में कोचिंग सेंटर में लगी आग ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस हादसे में छात्र अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदने तक को मजबूर हो गए थे। लखनऊ समेत देश के कई शहरों में आगजनी की घटनाओं ने भी यह साबित किया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भयावह साबित हो सकती है। ऐसे हादसों से सबक लेने के बजाय यदि हरिद्वार में कमियां मिलने के बाद भी केवल नोटिस देकर मामला छोड़ दिया जाए, तो यह चिंता का विषय है। आखिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों करे?
हैरानी की बात यह भी है कि विभाग ने कमियां मिलने की पुष्टि तो कर दी, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस जारी कर दिया। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या कोई प्रशासनिक कारण है, या किसी प्रभावशाली अधिकारी का संरक्षण कार्रवाई की राह में बाधा बना हुआ है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग को देना चाहिए।
कोटा क्लासेज और आकाश इंस्टीट्यूट को लेकर रिपोर्ट में फायर NOC और व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है, जबकि उड़ान इंस्टीट्यूट और एक अन्य संस्थान के संबंध में कमियां दर्ज करते हुए सुधार के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में सवाल केवल एक संस्थान का नहीं, बल्कि पूरे शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था का है।
शिक्षा का मंदिर तभी सुरक्षित है, जब वहां पढ़ने वाला हर छात्र सुरक्षित हो। यदि सुरक्षा मानक पूरे नहीं हैं, तो कार्रवाई भी उतनी ही सख्त होनी चाहिए। क्योंकि आग लगने के बाद नोटिस नहीं, बल्कि जानें जाती हैं।
बड़ा सवाल…जवाब कौन देगा..?

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