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एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने दस वर्षीय मासूम को उसकी माँ से मिलवाया

 

हरिद्वार।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को चार दिन पहले दस वर्षीय मासूम को हरकी पैडी क्षेत्र सुभाष घाट से ठंड में ठिठुरते हुए लावारिस हालत में घूमते हुए मिला। टीम ने बालक को कुछ गर्म कपडे दिलाकर बालगृह में संरक्षण दिलाया था। मासूम की परिजनों की तलाश में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट जुट गयी। टीम को सफलता मिली। मां—बाप की आपसी लड़ाई में बाप दस साल के बेटे को तीर्थनगरी में छोड़ कर चला गया था। मासूम की मां के पहुंचने पर बाल गृंह से सकुशल सुपुर्द कर दिया। बेटे के मिल जाने पर मां के आंखों से आंसू रुकने के नाम नहंी ले रहे थे। बेटे को गले से लगाकर फफक-फफक काफी देर तक रोती रही। इस दृश्य को देख कर मौजूद सभी लोगों की आंखों में भी पानी आ गया। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का धन्यवाद कर बेटे को साथ ले गयी।
तीर्थनगरी में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को मासूम के मिलने के बाद उसे बाल गृह में संरक्षण में रखा गया। टीम के सदस्यों के बच्चे से जितनी जानकारी मिली उसी आधार पर तलाश की जा रही थी। काफी प्रयास के बालक की माता को गाजियाबाद से तलाश करने में सफलता हासिल की गई। जिसके बाद महिला अपने देवर के साथ बच्चे को लेने हरिद्वार पहुंची। बच्चों के परिजनों को बालकल्याण समिति रोशनाबाद के समक्ष प्रस्तुत कर बाद आदेश के काउंसलिंग के बाद मासूम बालक को उसकी माता के सुपुर्द किया गया। मासूम चार भाई हैं। तीन साल पूर्व उसके माता—पिता में विवाह विच्छेद होने के कारण मां तीन बच्चों के साथ ननिहाल में रह कर उनका पालन पोषण कर रही थी तो वहीं मासूम तीन साल से अपने पिता के पास फिरोजाबाद में रह रहा था। शराब नशे का आदी होने के कारण मासूम के पिता 31 दिसम्बर 2023को बालक को हरिद्वार घूमने के बहाने लाया। रात्रि में नींद में सोता हुआ छोड कर कहीं चला गया। सुबह आंख खुलने पर मासूम ने अपने पिता को काफी खोजा पर वो नहीं मिला। अनजान शहर में मासूम कभी भंडारों में कभी आने जाने वाले यात्रियों से भिक्षा मांग कर अपने पेट की आग बुझाने लगा। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट टीम को मिल जाने पर पुन: एक बार तीन साल बाद मां की गोद मिल गयी।

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