वाणियों और प्रवचनों को सुननें से कम होती है मोह माया: मास्टरजी
हरिद्वार। प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु मास्टरजी ने बुधवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि नियमित रूप से आध्यात्मिक वाणियों और प्रवचनों को सुनने से मनुष्य की सांसारिक मोह-माया कम होती है तथा उसे आत्मिक शांति और सच्चे आनंद की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं के बीच मानसिक तनाव, एंजायटी, डिप्रेशन, अनिद्रा, आत्महत्या के विचार और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुकी है। इन समस्याओं का स्थायी समाधान केवल आध्यात्मिकता और आत्मज्ञान के माध्यम से ही संभव है। मास्टरजी ने कहा कि जब व्यक्ति जीवन के गहरे ज्ञान को समझता है, तभी वह अपने वास्तविक स्वरूप से जुड़ पाता है। इससे मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और आंतरिक परिवर्तन का अनुभव होता है। उन्होंने बताया कि उनकी शिक्षाएं देशभर में विभिन्न माध्यमों से लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 18 वर्षों से वे अपने प्रवचनों के माध्यम से लोगों को जीवन जीने की सही दिशा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। विशेष रूप से युवाओं, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को तनावमुक्त एवं सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जाता है। उनका उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भाव और खुशियां बांटना तथा लोगों को आत्मिक रूप से सशक्त बनाना है।

















































