हरिद्वार। वर्ष 2005 में दर्ज बहुचर्चित धोखाधड़ी मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) हरिद्वार की अदालत ने करीब 21 वर्ष बाद फैसला सुनाते हुए आरोपी राजवीर सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। अदालत ने गवाहों के बयानों और दस्तावेजी साक्ष्यों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए, जिसके आधार पर 19 जून 2026 को आरोपी को दोषमुक्त किया गया।
मामला कोतवाली ज्वालापुर में दर्ज किया गया था। आरोप था कि कुछ लोगों ने बेरोजगार युवकों को हिंदुस्तान लीवर कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे धनराशि ली थी। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 471, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
आरोपी राजवीर सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अरविन्द कुमार श्रीवास्तव ने पैरवी की। फैसले के बाद राजवीर सिंह ने कहा कि उन्होंने मुकदमा दर्ज होने के बाद से अपने अधिवक्ता पर पूरा भरोसा बनाए रखा, जिसका परिणाम उन्हें न्याय के रूप में मिला।
करीब दो दशक से अधिक समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने एक लंबे समय से लंबित मामले का पटाक्षेप कर दिया है।












































