न्यू जर्सी में भव्य 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया,जन्मशताब्दी वर्ष को अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ
हरिद्वार, 4 अगस्त।
अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विश्वभर में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत अमेरिका के न्यू जर्सी में भव्य 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। श्रद्धा, साधना और लोकमंगल की भावना से संपन्न इस महायज्ञ में अमेरिका के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर विश्वशांति, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और युग निर्माण के संकल्प को दोहराया। महायज्ञ के समापन पर विशेष दीप महायज्ञ का भी आयोजन किया गया।
महायज्ञ के संचालन के लिए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पंड्या के नेतृत्व में उच्च प्रशिक्षित टीम अमेरिका पहुंची। इस अवसर पर डॉ. पंड्या ने कहा कि वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी का जन्मशताब्दी वर्ष केवल एक स्मरणोत्सव नहीं, बल्कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और वंदनीया माताजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का वैश्विक जनजागरण अभियान है।
उन्होंने कहा कि गुरुसत्ता का स्नेह, संरक्षण और मार्गदर्शन प्रत्येक साधक के साथ निरंतर जुड़ा हुआ है। आवश्यकता इस दिव्य प्रेरणा को सेवा, साधना, संस्कार, आत्मपरिष्कार और समाज निर्माण के रचनात्मक प्रयासों में रूपांतरित करने की है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि जन्मशताब्दी वर्ष के प्रत्येक कार्यक्रम को जनजागरण, व्यक्तित्व परिष्कार और युग निर्माण का प्रभावी माध्यम बनाते हुए अधिक से अधिक लोगों तक गुरुदेव एवं वंदनीया माताजी के जीवन-दर्शन और विचार क्रांति का संदेश पहुंचाया जाए।
कार्यक्रम के दौरान जन्मशताब्दी वर्ष को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुआ। न्यू जर्सी राज्य की सीनेट एवं जनरल असेंबली ने संयुक्त विधायी प्रस्ताव पारित कर वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के जन्मशताब्दी वर्ष को आधिकारिक मान्यता प्रदान की। प्रस्ताव में उनके आध्यात्मिक जागरण, नारी सशक्तिकरण, मानवीय सेवा, नैतिक मूल्यों तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के वैश्विक रचनात्मक अभियानों की विशेष सराहना की गई।
इसी क्रम में पिस्काटावे टाउनशिप के मेयर ब्रायन सी. वाहलर ने विशेष प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर वंदनीया माताजी के शिक्षा, सेवा, नारी जागरण और समाज निर्माण में दिए गए योगदान का सम्मान किया। इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि यह सम्मान किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और विश्वकल्याण के उस अभियान का सम्मान है, जिसकी शुरुआत युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माताजी ने की थी।


















































