रानीपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से जुड़ा मामला, तीन दिन में आपत्तियां वापस लेने की मांग
हरिद्वार। रानीपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से संबंधित दर्ज की गई आपत्तियों को लेकर विवाद सामने आया है। मामले में अधिवक्ता राव शहबाज अली की ओर से दो अलग-अलग कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में कथित तौर पर बिना पर्याप्त साक्ष्य के 22 आपत्तियां दर्ज किए जाने पर सवाल उठाते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की गई है।
नोटिस के अनुसार, अधिवक्ता फर्मान अली की ओर से विधानसभा क्षेत्र 26 रानीपुर के अंतर्गत मतदाता सूची से संबंधित आपत्तियों के मामले में संबंधित व्यक्ति को नोटिस भेजा गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 22 आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जिनके संबंध में नोटिस में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है।
अधिवक्ता ने नोटिस में कहा है कि आपत्तियां कथित रूप से झूठे कथनों पर आधारित हैं और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए प्रारूप-7 का इस्तेमाल किया गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर नियमों के विपरीत बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई गईं।
दूसरे नोटिस में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) को भी संबोधित करते हुए आपत्तियों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के आपत्तियां प्राप्त की गईं और संबंधित पक्ष को इससे मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
अधिवक्ता की ओर से भेजे गए नोटिस में संबंधित पक्ष को नोटिस प्राप्त होने के तीन दिन के भीतर सभी आपत्तियों को वापस लेने तथा संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। साथ ही संबंधित पक्षों और प्रभावित व्यक्तियों को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराने को कहा गया है कि प्रारूप-7 के तहत की गई आपत्तियां वापस ले ली गई हैं।
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर अधिवक्ता और अन्य प्रभावित व्यक्ति सक्षम न्यायालय में मुकदमा दायर कर सकते हैं। नोटिस में होने वाले संभावित हर्जे और खर्च की जिम्मेदारी संबंधित पक्ष पर होने की बात भी कही गई है।
मामला सामने आने के बाद रानीपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से जुड़ी आपत्तियों की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अधिवक्ता ने अपने नोटिस में नियमों के अनुरूप आपत्ति दर्ज कराने और उसके समर्थन में आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
फिलहाल नोटिस में लगाए गए आरोप संबंधित पक्ष की ओर से लगाए गए दावे हैं। मामले में दूसरे पक्ष का जवाब सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





















































