सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक का नरेश बंसल ने किया पुरजोर समर्थन
नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष डॉ. नरेश बंसल ने आज सदन में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा में भाग लेते हुए विधेयक का पुरजोर समर्थन किया।
डॉ. बंसल ने कहा कि न्याय केवल संविधान में लिखा शब्द नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। न्याय में देरी होने पर केवल मुकदमा लंबित नहीं रहता, बल्कि नागरिक का न्याय व्यवस्था पर विश्वास भी प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या 95 हजार से अधिक है। वर्ष 2025 में 75,410 नए मामले आए, जबकि 65,615 मामलों का निपटारा हुआ। ऐसे में नए मामलों की संख्या लगातार बढ़ने से न्याय व्यवस्था पर क्षमता बढ़ाने का दबाव स्वाभाविक है।
उन्होंने बताया कि विधेयक के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 किए जाने का प्रस्ताव है। मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने पर कुल संख्या 38 न्यायाधीशों की होगी। बंसल ने कहा कि यह केवल चार नए पद बढ़ाने का विधेयक नहीं, बल्कि न्याय देने की संस्थागत क्षमता को मजबूत करने का प्रयास है।
40 साल पुरानी जनहित याचिका का भी किया उल्लेख
डॉ. बंसल ने सदन में लंबित जनहित याचिकाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 3,525 PIL लंबित हैं, जिनमें 698 एक दशक से अधिक पुरानी हैं। उन्होंने 1984 की सबसे पुरानी जनहित याचिका का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि न्याय के लिए उठाया गया सवाल दशकों तक जवाब का इंतजार करे तो न्याय व्यवस्था की क्षमता पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विधेयक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य संविधान पीठों का नियमित और निरंतर गठन आसान बनाना भी है, ताकि संवैधानिक महत्व के मामलों की सुनवाई नियमित अपीलीय कार्यवाही को प्रभावित किए बिना प्रभावी ढंग से हो सके।
न्यायपालिका मजबूत होगी तो संविधान मजबूत होगा
डॉ. बंसल ने कहा, “धर्मो रक्षति रक्षितः” का भाव न्याय व्यवस्था पर भी पूरी तरह लागू होता है। न्यायपालिका जितनी मजबूत होगी, संविधान उतना ही मजबूत होगा और संविधान जितना मजबूत होगा, नागरिक उतना ही सुरक्षित होगा।
उन्होंने न्याय को आम नागरिक की पहुंच तक ले जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि टेली-लॉ जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से 776 जिलों और करीब ढाई लाख ग्राम पंचायतों तक कानूनी सहायता पहुंचाने तथा 1.12 करोड़ से अधिक मामलों में पूर्व-विवाद परामर्श दिए जाने का उल्लेख किया गया है।
अंत में डॉ. बंसल ने कहा कि न्याय की राह में कोई दीवार नहीं होनी चाहिए और आम नागरिक के मन में लाचारी का भाव नहीं आना चाहिए। संविधान का सम्मान तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक नागरिक को समय पर न्याय मिल सके।





















































