-जेल जाने से बचने का डर दिखाकर दिया अंजाम
हरिद्वार।
देहरादून न्यायिक व पुलिस अधिकारियों के नाम से ऑनलाइन फर्जी गैर जमानती वारंट भेज कर जेल जाने से बचाने के नाम पर तीस हजार रुपए की ठगी की गयी। पीड़ित ने पुलिस में तहरीर देकर साइबर ठगी करने वालों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरु कर दी है।
कोतवाली ज्वालापुर प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह ने बताया कि सुरेन्द्र पुत्र सुमन हाल निवासी शिवधाम कालोनी सुभाष नगर ज्वालापुर ने तहरीर देकर फर्जी गैर जमानती वारंट भेज साइबर ठगी करने का मुकदमा दर्ज कराया है। तहरीर में जानकारी दी कि वह ग्राम सतांव थाना गुरुबख्शगंज, जिला रायबरेली (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला हूं। वर्तमान में हरिद्वार में प्राईवेट कम्पनी में काम करता हूं। 26 जुलाई को उसके मोबाइल फोन पर एक नोटिफिकेशन आई और जब प्रार्थी ने उस नोटिफिकेशन पर क्लिक किया तो एक पीडीएफ फाइल अपने आप प्रार्थी के मोबाईल में डाउनलोड हो गई जिस पीडीएफ में प्रार्थी के नाम पर कोतवाली पटेल नगर देहरादून (उत्तराखंड) से एक गैर-जमानती वारंट जारी दिखाया गया था। एक सड़क दुर्घटना के मुकदमे में किसी गवाह के बयान के आाधार पर शामिल होना बताया गया। पूर्व में पुलिस ने नोटिस भेजे गये थे। थाने में जाकर उपस्थित नही हुआ। देहरादून के न्यायिक एवं पुलिस अधिकारियों ने 5 हजार का गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया है। गैर-जमानती वारण्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि 2 घंटे के अंदर गैर-जमानती वारंट पर दिये गये न्यायिक एवं पुलिस अधिकारियों के यूपीआई कोड और उत्तराखण्ड पुलिस के सरकारी बैंक खाता संख्या तीस हजार रूपये ट्रांसफर करने होंगे। अन्यथा पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जाएगा। किसी भी न्यायालय से जमानत नहीं मिलेगी। गैर-जमानती वारंट में जांच अधिकारी जुरेश कुमार (उप निरीक्षक) का नाम लिखा हुआ था। साथ ही कई अन्य न्यायिक व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम श्रीमती आरजू (अपर जिला जज-प्रथम, देहरादून), शेखर कुमार (पुलिस उपाधीक्षक देहात), योगेश कुमार (पुलिस अधीक्षक, नगर), राजू भाटिया (पुलिस उपाधीक्षक), किशन दास त्यागी (क्षेत्राधिकारी), श्रीमती रविना लांबा (प्रभारी निरीक्षक, सीआईयू) का नाम लिखा था । राज्य के उच्चाधिकारियों के नाम देखकर गैर जमानती वारंट के डर और भ्रम में आकर अपने बैंक खाते से फर्जी वारण्ट के अनुसार तीस हजार का आनलाइन भुगतान गैर जमानती वारंट में निर्देशित माध्यमों पर अदा कर दिया। इस घटना की जानकारी अपने मित्र को दी और तथ्यों की जांच कराई, तो पता चलाा गैर जमानती वारंट पूरी तरह से फर्जी और कूटरचित था। भविष्य में पचास हजार की ठगी की जा सकती है। तहरीर के आधार पर साइबर ठगी करने वालों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।





















































