लक्सर के भुरनी खतीरपुर गांव में आधी रात मगरमच्छ की दस्तक… दो पालतू कुत्तों को बनाया शिकार और फिर एक मकान की छत पर जा चढ़ा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल—मगरमच्छ से ज्यादा ग्रामीणों को सिस्टम की रफ्तार ने क्यों डराया? रात के अंधेरे में गांव में मगरमच्छ घूम रहा था… ग्रामीण मदद के लिए 112 पर फोन करते रहे, वन विभाग की रेस्क्यू टीम का इंतजार होता रहा और करीब तीन घंटे बाद टीम गांव पहुंची। सवाल है—अगर इस दौरान मगरमच्छ किसी बच्चे या ग्रामीण पर हमला कर देता तो जिम्मेदारी किसकी होती?
लक्सर क्षेत्र के भुरनी खतीरपुर गांव में शुक्रवार देर रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक मगरमच्छ गांव में घुस आया। मगरमच्छ ने दो पालतू कुत्तों को अपना शिकार बना लिया। आसपास के कुत्तों के लगातार भौंकने के बाद मगरमच्छ एक मकान की छत पर जा चढ़ा।
कुत्तों के मालिक ने जब अपने कुत्तों को तलाश किया तो सड़क पर खून पड़ा दिखाई दिया। तलाश करने पर उसे मगरमच्छ नजर आया, जिसके बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने मदद के लिए 112 पर संपर्क किया, लेकिन पुलिस ने मामला वन विभाग का बताते हुए जिम्मेदारी वन विभाग पर डाल दी। इसके बाद वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना दी गई, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक टीम करीब तीन घंटे बाद, सुबह साढ़े पांच बजे गांव पहुंची।
इस दौरान गांव के कुछ युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर मगरमच्छ को काबू किया और बाद में उसे रेस्क्यू टीम के सुपुर्द किया गया।
अब ग्रामीणों का सवाल है अगर यही घटना दिन के समय होती और मगरमच्छ के सामने कोई छोटा बच्चा आ जाता, तो रेस्क्यू टीम के पहुंचने तक क्या होता?
सवाल सिर्फ मगरमच्छ के रेस्क्यू का नहीं… सवाल आपात स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था की तत्परता का भी है।





















































