देहरादून हरिद्वार

फर्जी प्रमाणपत्र: कहाँ हुई बड़ी चूक, हस्ताक्षर मामले में हरिद्वार के भी एक अधिकारी का नाम

देहरादून। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के प्रमाणपत्रों पर बड़ा सवाल… एक ही कथित स्वतंत्रता सेनानी के नाम के दस्तावेजों के आधार पर चार अभ्यर्थियों ने MBBS में दाखिला ले लिया। जांच हुई तो रिकॉर्ड में उस स्वतंत्रता सेनानी का नाम ही नहीं मिला और चारों दाखिले रद्द कर दिए गए। आवेदन से लेकर प्रमाणपत्र जारी होने तक सत्यापन की प्रक्रिया में आखिर चूक कहां हुई?

देहरादून की सदर तहसील से जुड़े इस मामले में चार अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र जांच में संदिग्ध पाए गए। प्रशासन के मुताबिक चारों आवेदनों में धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र लगाया गया था, लेकिन संबंधित सरकारी पंजिका में इस नाम का रिकॉर्ड नहीं मिला।

जांच के दौरान दिए गए पतों पर भी अभ्यर्थियों या उनके परिवार के सदस्यों के रहने की पुष्टि नहीं हुई। दस्तावेजों और शपथपत्रों में भी कई विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह ने चारों प्रमाणपत्र निरस्त किए और इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर हुए चारों MBBS दाखिले भी रद्द कर दिए गए।

मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है। वहीं अब पुलिस आवेदन से लेकर प्रमाणपत्र जारी होने तक की पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि पता चल सके कि दस्तावेज किन-किन स्तरों से होकर आगे बढ़े।

और यहीं से बड़ा सवाल खड़ा होता है की जब दस्तावेजों में इतनी गंभीर विसंगतियां थीं, तो सत्यापन की प्रक्रिया में इन्हें पहले क्यों नहीं पकड़ा गया?

क्या सिस्टम में सिर्फ आवेदन करने वाले की जिम्मेदारी है, या प्रमाणपत्र जारी होने से पहले होने वाले सत्यापन की प्रक्रिया की भी समीक्षा होनी चाहिए?

फिलहाल जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय होगी।

चार दाखिले रद्द हो गए, FIR भी दर्ज हो गई… लेकिन अब नजर इस बात पर है कि जांच आवेदन से आगे बढ़कर पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की कड़ियों तक पहुंचती है या नहीं।

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