हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के साइबर क्राइम हॉटस्पॉट अभियान के तहत हरिद्वार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नालंदा-नवादा से जुड़े कथित ‘मगध साइबर गैंग’ का भंडाफोड़ किया है। कोतवाली श्यामपुर पुलिस ने एक स्विफ्ट कार की चेकिंग के दौरान 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में ₹2.75 करोड़ से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग सामने आए हैं।
पुलिस के अनुसार, 25 अगस्त की रात सज्जनपुर पीली क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि एक सफेद रंग की स्विफ्ट कार में साइबर फ्रॉड से जुड़े कुछ लोग सवार हैं। सूचना के आधार पर रसियाबड़ सिंगल लाइन प्वाइंट पर चेकिंग शुरू की गई। चिड़ियापुर की ओर से पहुंची स्विफ्ट कार को रोककर तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान पुलिस को एक बैग से साइबर फ्रॉड से जुड़ी सामग्री का बड़ा जखीरा मिला। बरामद सामान में 35 एटीएम /डेबिट कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 14सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, एक लैपटॉप चार्जर, 10 एटीएम कवर, पेन कार्ड और ₹37,500 नकद शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, बरामद पासबुकों में कई बड़े बैंको समेत अन्य बैंकों के खाते मिले हैं। खातों का संबंध ऋषिकेश, हरिद्वार, कनखल, देहरादून और आसपास के क्षेत्रों से बताया गया है।
वहीं, एटीएम/ डेबिट कार्डों में कई प्राइवेट बैंको समेत विभिन्न बैंकों के कार्ड बरामद हुए, पुलिस के अनुसार, बरामद मोबाइल फोन के प्रारंभिक परीक्षण में व्हाट्सएप चैट, बैंक खाता नंबर, खाताधारकों के नाम, QR कोड और लेन-देन से संबंधित बातचीत मिली है। मोबाइल की गैलरी में कई बैंक पासबुक और खातों से जुड़े दस्तावेजों की तस्वीरें भी मिली हैं।
प्रारंभिक बैंकिंग और डिजिटल विश्लेषण में ₹2.75 करोड़ से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिले हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक साइबर अपराध की रकम और पूरी मनी ट्रेल का निर्धारण विस्तृत बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के बाद किया जाएगा।
पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि आरोपी स्थानीय लोगों से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम प्राप्त करते थे। इन खातों का एटीएम और यूपीआई/ यूडीआई तैयार कर उनका एक्सेस अपने पास रखा जाता था।
साइबर फ्रॉड की रकम आने के बाद उसे म्यूल अकाउंट → यूपीआई ट्रांसफर → दूसरे खाते → एटीएम से कैश निकासी के जरिए निकाला जाता था। इसके बाद रकम को कमीशन के रूप में बांटने की बात सामने आई है।
गिरफ्तार आरोपियों में अधिकतर बिहार के नालंदा और नवादा जिले के निवासी हैं। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में बिहार क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों द्वारा बैंक खाते उपलब्ध कराने और साइबर फ्रॉड की रकम से संबंधित जानकारी देने की बात सामने आई है। पुलिस अब इन लोगों की भूमिका और पूरे नेटवर्क के मुख्य संचालकों की तलाश कर रही है।
पकड़े गए पांच आरोपियों में
कृष्णा पाण्डे नालंदा, बिहार, निरंजन कुमार नवादा, बिहार, सन्नी हरिद्वार, चन्द्रमणि कुमार नवादा, बिहार, चन्दन पाण्डे हरिद्वार
पुलिस के अनुसार आरोपियों के विरुद्ध धारा 318(4), 317(2), 3(5) बीएनएस तथा धारा 66सी, 66डी आईटी एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है। बरामद मोबाइल और लैपटॉप का विस्तृत डिजिटल परीक्षण न्यायालय की अनुमति के बाद किया जाएगा।
हरिद्वार पुलिस का कहना है कि बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर अन्य साइबर अपराधियों, म्यूल अकाउंट धारकों और नेटवर्क के मुख्य संचालकों की पहचान की जा रही है।
एसएसपी हरिद्वार ने कहा कि साइबर अपराधी कहीं भी छिपे हों, पुलिस उनके नेटवर्क तक पहुंचकर उन्हें कानून के शिकंजे में लाएगी




















































