कुंभ से पहले बिजली विभाग का ‘कुबेर स्नान’? 10 दिन में पोल पर लगी महंगी रबर शीट कचरे में
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में कुंभ मेले की तैयारियों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। सवाल विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर है और सवाल उन महंगी ब्लैक रबर शीट को लेकर है, जिन्हें कुछ दिन पहले शहर के बिजली के खंभों पर चिपकाया गया था।
हैरानी की बात देखिए! मुश्किल से 10 दिन पहले विद्युत विभाग ने शहर के बिजली के खंभों पर काले रंग की रबर शीट लगवाई। यहां तक कि ऐसे खंभों पर भी ये शीट चिपका दी गईं, जिन पर बिजली के तार तक नहीं थे और जिन्हें हटाया जाना था।
उस वक्त इस काम को लेकर खूब वाहवाही बटोरी गई। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
जिलाधिकारी के निर्देश के बाद शहर से इन बिजली के खंभों को हटाने का काम शुरू हो गया। और जैसे ही खंभे हटाए गए, उन पर लगाई गई महंगी ब्लैक रबर शीट भी सड़क किनारे कचरे की तरह फेंकी नजर आने लगीं।
अब सवाल यह है कि आखिर इन खंभों पर रबर शीट लगाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या विद्युत विभाग को पहले से यह जानकारी नहीं थी कि इन खंभों को हटाया जाना है? अगर जानकारी थी तो फिर सरकारी धन खर्च करके इन पर रबर शीट क्यों लगाई गई?
क्या विभाग के अधिकारियों ने बिना किसी योजना के काम कराया? क्या टेंडर और भुगतान की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ? और सबसे बड़ा सवाल, आखिर इस पूरे काम पर जनता के टैक्स का कितना पैसा खर्च हुआ?
कुंभ मेले से पहले शहर को व्यवस्थित और सुंदर बनाने के नाम पर अगर कुछ ही दिनों में लाखों रुपये का सामान बेकार हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
फिलहाल इन तस्वीरों ने विद्युत विभाग की कार्ययोजना और खर्चों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इसे घोटाला कहना अभी जांच का विषय है, लेकिन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, खर्च का हिसाब और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब जरूर मांगा जाना चाहिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ रबर शीट के कूड़े में फेंके जाने का नहीं है, सवाल जनता की गाढ़ी कमाई का है।
कुंभ से पहले शहर का विकास हो रहा है या सरकारी धन की ऐसी बर्बादी पर किसी का ध्यान ही नहीं है?
विद्युत विभाग और जिम्मेदार अधिकारी जनता को इसका जवाब देंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? इस संबंध में हरिद्वार के अधिशासी अभियंता से बात करने के लिये फोन किया गया परंतु उनका फोन नही उठा,,,
























































