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हरिद्वार। जगजीतपुर मौजे स्थित सकून होटल की जमीन को लेकर अब सिंचाई विभाग और तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध विभागीय पत्र के अनुसार, वर्ष 2025 नवंबर माह में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से होटल प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद होटल प्रबंधन ने अपनी भूमि और निर्माण को वैध बताते हुए विभिन्न दस्तावेज विभाग के समक्ष प्रस्तुत किए।
होटल प्रबंधन की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में बैनामा, एचआरडीए से स्वीकृत नक्शा, उत्तराखंड जल संस्थान, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग की अनापत्ति तथा नगर निगम से संबंधित दस्तावेज शामिल बताए गए हैं।
इसके बाद उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के जिलेदार आराजी द्वितीय, उत्तरी खंड गंगा नहर, हरिद्वार की ओर से तहसीलदार हरिद्वार को पत्र भेजकर प्रस्तुत दस्तावेजों और भूमि अभिलेखों का राजस्व रिकॉर्ड से सत्यापन कराने का अनुरोध किया गया।
विभागीय पत्र में खसरा नंबर 211/6, 211/1/2 में गंगा जी दर्ज होने और उक्त भूमि के जमींदार उन्मूलन क्षेत्र के अंतर्गत होने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि संबंधित बैनामे की पुष्टि विभाग में उपलब्ध अभिलेखों से नहीं हो पा रही है। ऐसे में तहसील के राजस्व अभिलेखों से दस्तावेजों का सत्यापन कराने की जरूरत बताई गई है।
लेकिन आरोप है कि पत्र भेजे जाने के करीब 10 माह बीत जाने के बावजूद तहसील स्तर से न तो जांच पूरी की गई और न ही सिंचाई विभाग को कोई स्पष्ट जानकारी दी गई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब मामला सरकारी विभाग की भूमि और राजस्व अभिलेखों के सत्यापन से जुड़ा है तो तहसील प्रशासन की ओर से कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई? क्या संबंधित भूमि के अभिलेखों का सत्यापन किया गया? यदि नहीं किया गया तो इसकी वजह क्या है?
हालांकि, सकून होटल की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की वैधता और भूमि पर किसी अवैध कब्जे का अंतिम निर्धारण संबंधित राजस्व एवं सक्षम विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। ऐसे में अब देखना होगा कि तहसील प्रशासन इस मामले में कब तक जांच पूरी कर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को रिपोर्ट उपलब्ध कराता है या माफिया के दबाव में आगे भी कोई जांच नही होने वाली। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार विभाग द्वारा सिंचाई विभाग की भूमियों पर अवैध कब्जे कर किए गए पक्के निर्माणों को भारती करण के आदेश जारी हो चुके हैं। बावजूद इसके कई बार जिला प्रशासन को फोर्स देने के लिए भी पत्र लिखे गए बावजूद इसके जिला प्रशासन ने आज तक भी अवैध कब्जे हटाने के लिए सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश को पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराई।