चारधाम हेली सेवा पर 2 नवंबर से ब्रेक! DGCA के दो पायलट वाले आदेश से मचा हड़कंप, हजारों यात्रियों की बुकिंग पर संकट
उत्तराखंड की चारधाम हेली सेवा पर 2 नवंबर से रोक लगने जा रही है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के नए आदेश ने हेली एविएशन कंपनियों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। आदेश के मुताबिक अब सभी चार्टर उड़ानों में दो पायलट अनिवार्य होंगे।
30 अक्टूबर को ट्रांस भारत एविएशन दुर्घटना के ठीक एक दिन बाद जारी इस आदेश पर हेली सेवा संचालकों ने सवाल उठाए हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि एयरबस AS350, H125 और बेल 407 जैसे सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर एक पायलट के लिए प्रमाणित हैं। दुनिया के कई देशों में इन्हें एक ही पायलट के साथ व्यावसायिक उड़ान की अनुमति है।
हेली ऑपरेटरों का तर्क है कि DGCA का यह फैसला सुरक्षा बढ़ाने के बजाय चारधाम हेली सेवाओं को आर्थिक रूप से प्रभावित करेगा। उनका कहना है कि इन हेलीकॉप्टरों में दूसरे पायलट के लिए अतिरिक्त सीट या आवश्यक व्यवस्था ही नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल आदेश जारी करने के समय को लेकर भी उठ रहा है। ऑपरेटरों का आरोप है कि दुर्घटना की जांच पूरी होने और उसके वास्तविक कारण सामने आने से पहले ही पूरे सेक्टर पर एक समान प्रतिबंध लगा दिया गया।
इस फैसले का सीधा असर चारधाम यात्रा पर पड़ सकता है। हर सीजन में हजारों श्रद्धालु केदारनाथ सहित अन्य धामों तक पहुंचने के लिए हेली सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। वहीं पायलट, इंजीनियर और ग्राउंड स्टाफ की आजीविका पर भी संकट खड़ा होने की आशंका है।
ऑपरेटरों ने आदेश वापस लेने तक हेली सेवाएं स्थगित रखने की बात कही है।
अब सवाल यह है कि क्या सुरक्षा के नाम पर लिया गया यह फैसला वास्तव में दुर्घटनाओं को रोक पाएगा, या फिर बिना पर्याप्त तकनीकी अध्ययन के लिया गया निर्णय चारधाम हेली सेवा और श्रद्धालुओं दोनों के लिए परेशानी का कारण बनेगा?


























































