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राजाजी टाइगर रिजर्व के कोर जोन में वन भूमि पर बिना अनुमति भव्य शादी की तैयारी: वन विभाग की दोहरी नीति पर सवाल
हरिद्वार।
उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व (Rajaji Tiger Reserve) की हरिद्वार रेंज (रानीपुर रेंज) में स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर (Sureshwari Devi Temple) के आसपास वन भूमि पर बिना किसी अनुमति के भव्य टेंट लगाकर शादी समारोह की तैयारियां जोरों पर थीं। यह क्षेत्र टाइगर रिजर्व का “प्रतिबंधित कोर जोन” है, जहां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और वन संरक्षण अधिनियम के सख्त नियम लागू होते हैं। हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद इनकी धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।

शिकायत दर्ज होने के बाद वन विभाग ने टेंट हटाए, लेकिन सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी तैयारी बिना विभाग की जानकारी के कैसे हो गई? और शिकायतकर्ता अधिकारियों पर ही उल्टा आरोप लग रहा है कि उन्होंने खुद हटवाया। स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता इसे “वाह रे वन विभाग” की दोहरी नीति बता रहे हैं।
सुरेश्वरी देवी मंदिर, जो राजाजी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में रानीपुर रेंज के अंदर स्थित है। यह घना जंगल है, जहां बाघ, हाथी, तेंदुआ आदि वन्यजीवों का निवास है।
घटना उत्तराखंड के समाज कल्याण मंत्री खजान दास के बेटे की शादी के लिए मंदिर परिसर और आसपास की वन भूमि पर बिना अनुमति भव्य टेंट, सजावट और अन्य इंतजाम किए गए थे। शादी समारोह की तैयारियां पूरे जोरों पर थीं।
कोर जोन में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या बड़े सामाजिक आयोजन की अनुमति नहीं होती। वन अधिनियम और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के दिशानिर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। हाईकोर्ट भी ऐसे क्षेत्रों में निर्माण या आयोजनों पर सख्ती बरतने के निर्देश दे चुका है।
शिकायत के बाद राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने रविवार को टेंट हटाए। मंदिर जाने वाले गेट को कुछ समय के लिए बंद भी किया गया। मंदिर समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

यह घटना तब सामने आई जब तैयारियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय लोग सवाल कर रहे हैं कि “VIP प्रभाव” के कारण नियमों की अनदेखी की जा रही थी या नहीं।
वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
शिकायत के बाद जिन अधिकारियों ने कार्रवाई की, उन्ही पर आरोप है कि उन्होंने पहले अनुमति दी या आंखें मूंद लीं।
उल्लेखनीय है कि कोर जोन में मंदिर परिसर का विस्तार पहले भी विवादों में रहा है।
वन विभाग की भूमिका पर तीखी आलोचना हो रही है
“शादी रुकवाई, लेकिन जिम्मेदारी किसकी?”
वन विभाग का कहना है कि कोई अनुमति नहीं दी गई थी और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। वन्यजीव प्रेमी और पर्यावरण संगठन इसे सिस्टम की नाकामी बता रहे हैं।
यह मामला सिर्फ एक शादी का नहीं, बल्कि वन संरक्षण, नियमों का पालन और VIP संस्कृति का बड़ा सवाल खड़ा करता है। राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।
क्या VIP परिवारों के लिए नियम अलग होते हैं? वन विभाग को और सख्त होना चाहिए या मंदिर परिसर में सीमित धार्मिक गतिविधियों की छूट होनी चाहिए..?