उत्तराखंड स्वास्थ्य हरिद्वार

छोटी कटेली टीबी की रोकथाम में प्रभावशाली: आचार्य बालकृष्ण

सूक्ष्म जीवविज्ञान के विश्व प्रसिद्ध पर रिवाईव्ड जर्नल फ्रंटीयर इन माईक्रोबायोलॉजी में पतंजलि का शोध प्रकाशित
विश्व भर में विभिन्न सरकारी योजनाओं द्वारा टीबी की रोकथाम का प्रयास काफी लम्बे समय से किया जा रहा है  बालकृष्ण
पतंजलि, जनमानस को साध्य और असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाने के लिए पूर्ण संकल्पित  आचार्य बालकृष्ण

हरिद्वार।
तपेदिक यानि टीबी माइक्रो बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया से होती है, जो मनुष्य के फेफड$ो पर असर डालती है। टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और थूकने से फैलती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2022 में इस बीमारी से दुनियाभर में लगभग 1 करोड से अधिक लोग प्रभावित थे। यह एक ठीक होने वाली बीमारी होने के बाद भी बहुत से लोग इसकी वजह से काल के ग्रास में समा जाते हैं। यह बीमारी दुनिया के लगभग सभी देशो में फैली हुई है। भारत में भी वर्ष 1962 से ही इसकी रोकथाम के लिए सरकारी योजना चल रही हैं जिसमें रोगियों को नि:शुल्क दवाइयां उपलब्ध हैं।
इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि वर्तमान में टीबी के इलाज के लिए प्रयोग होने वाली दवाइयों में लिमिटेड बाया अवेलेबिलिटी होने के कारण बैक्टीरिया प्राय: एक या एक से अधिक दवाओं के प्रति तमेपेजंदज हो जाते हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक इन दवाओं के सेवन से हेपोटोटाक्सिस की सम्भावना बनी रहती है। अत: नई टीबी दवाओं या सहायक उपचार की आवश्यकता है जो इलाज को और अधिक प्रभावी बना सके।
पतंजलि द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार छोटी कटेली का अर्क टीबी के इलाज में प्रभावी है। इस अध्ययन का उद्देश्य टीबी के लिए एक आयुर्वेदिक उपचार विकसित करना था जिनका वर्तमान में प्रचलित टीबी की दवाइयों के साथ या अकेले भी प्रयोग किया जा सके।
इस अध्ययन में छोटी कटेली के अर्क पर शोध किया गया। छोटी कटेली के प्रभाव से इस टीबी बैक्टीरिया के विकास दर में कमी पाई गई। उन्नत तकनीको से पता चला कि टीबी के इलाज से बैक्टीरिया की संरचना बदल गई और उनकी कोशिकाआें की दीवार कमजोर हो गई। बैक्टीरिया की दवा के प्रति संवेदनशीलता बढ गई और दवा का प्रभाव भी बढ गया। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि के लिए यह अति हर्ष का विषय है कि अब इस अनुसंधान को सूक्ष्म जीव विज्ञान के विश्व प्रसिद्ध जर्नल में स्थान मिला है। यह शोध टीबी पर भविष्य के अध्ययनों के लिए नींव का कार्य करेगा जिससे जनमानस को टीबी से बचाव के लिए नवीन संभावनाए मिलेंगी।

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