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ब्लाक की फाइल में दम तोड गई विधवा की गुहार

लापरवाही और शंका में उलझ कर रह गया 2१ साल पहले बनने वाला मृत्यु प्रमाण पत्र
बदकिस्मती की शिकार, प्रशासन ने नहीं सुनी विधवा महिला की पुकार
पुष्पराज धीमान
पथरी।
जो मृत्यु प्रमाण पत्र 2१ साल पहले बन जाना चाहिए था वह पीडि$त की लापरवाही और उप जिलाधिकारी के शंका के बीच एेसा फंसा कि ब्लाक में पहुंचकर विधवा महिला की गुहार आज 3 महीने से ब्लाक अधिकारी की फाइल में पहुंच कर दम तोड$ गई है। करीब 28 साल पहले नसीरपुर कला में रहने वाला श्याम लाल पुत्र सोमनाथ का परिवार गांव छोड$कर बादशाहपुर ग्राम पंचायत के शेरपुर गांव में आकर बस गया था। 29 जनवरी 203 को श्याम लाल की मृत्यु हो गई थी। उसकी पत्नी पिंकी देवी अपने छोटे-छोटे 3 बच्चों को लेकर पहले तो अपने घर चूड$ी वाला चली गई, लेकिन बाद में वह यहां से भी घर बेचकर पहले मुजफ्फरनगर तो बाद में भगवानपुर में किराए पर रहने लगी। पहले तो पिंकी देवी ने श्यामलाल का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में लापरवाही की। लेकिन बाद में जब इसकी जरूरत महसूस हुई तो बाद में मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाने की जटिल प्रक्रिया को सुनकर चुपचाप घर बैठ गई और अपने बच्चों के लालन—पालन में उलझ गई। लेकिन ढलती उम्र में जीवन की आर्थिक जरूरत पूरी करने के लिए और तीन में से दो लड$कियों की शादी के बाद उसे विधवा पेंशन बनवाने के लिए तमाम औपचारिकता पूरी करते हुए 9 नवंबर 2२३ को उप जिलाधिकारी हरिद्वार से गुहार लगाई तो कई चक्कर काटने के बाद ग्राम विकास अधिकारी को आदेश हुए। उन्होंने बादशाहपुर में श्यामलाल की मृत्यु होने की जांच शेरपुर गांव की आंगनवाड$ी कार्यकर्ता की पंजिका एवं गांव के अन्य दो व्यक्तियों द्वारा लगाए गए शपथ पत्र के आधार पर करते हुए खंड विकास अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई। जिस पर खंड विकास अधिकारी द्वारा भी संतुष्टि की गई। लेकिन जब इस जांच के बाद यह प्रार्थना पत्र दोबारा से उप जिलाधिकारी हरिद्वार कार्यालय पहुंचा तो उनके संबंधित कामकाज संभालने वाले एक कर्मचारी द्वारा जांच पर शंका व्यक्त की। उप जिलाधिकारी द्वारा भी 2१ साल बाद मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने पर कई सवाल खड$े कर दिए। आपत्ति दर्ज करते हुए खंड विकास अधिकारी बहादराबाद को 18 जनवरी 2२४ को अपने स्तर से खुद जांच करने के लिए लिख दिया। ढाई महीने बाद जब उपजिलाधिकारी कार्यालय में पता किया गया की जांच होकर आ गई क्या या कितने समय लगेगा तो बताया गया अभी जांच होकर नहीं आई है कितना समय लगेगा कह नहीं सकते। इस संबंध में जब ब्लाक बहादराबाद में संबंधित प्रार्थना पत्र पर की गई कार्यवाही के बारे में पूछा गया तो ब्लाक में क्रमांक संख्या के आधार पर आवेदन ढूंढा गया। वह आवेदन तो उन्हें मिल गया लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। इस संबंध में जब ब्लाक में कार्यरत संबंधित कर्मचारी पवन कुमार से पूछा तो उन्होंने बताया यह आवेदन तो अभी फाइल में ही पड$ा है। साहब के सामने गया ही नहीं। हालांकि इसके बीच में खंड विकास अधिकारी मानस मित्तल से भी वार्ता की गई। उन्होंने भी यही जवाब दिया कि एेसा कोई प्रार्थना पत्र मेरे संज्ञान में नहीं आया है। मेरे पास लंबित नहीं है। हैरानी तो तब हुई जब बिना किसी कार्रवाई के उप जिलाधिकारी के यहां से आन रिकार्ड आया हुआ यह प्रार्थना पत्र फाइल से निकाल कर पीडि$त के परिचित को एेसे ही थमा दिया। कुल मिलाकर यह प्रमाण पत्र आज तक भी नहीं बन पाया है और विधवा महिला सारे कागज बनवाकर औपचारिकता पूरी करने के बावजूद भी पति का मृत्यु प्रमाण पत्र न बनने से महिलाआें के हितैषी कहीं जाने वाली भाजपा सरकार में खुद को निराश और ठगा सा महसूस कर रही है। बताया जाता है पीडि$ता भगवानपुर में ही किसी कंपनी में काम कर रही है और उनका लड$का भगवानपुर में ही किसी की गाड$ी चला रहा है।
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