हरिद्वार।
लालढांग क्षेत्र स्थित कटेबढ रवासन नदी में रिवर ड्रेजिंग के नाम पर जो खेल हुआ, वह सिर्फ खनन नहीं यह प्रशासनिक मिलीभगत का खुला नमूना है।
25 मार्च 2025 को जीवी इंफ्राटेक प्रा. लि. को रसूलपुर मीठीबेरी में खसरा नंबर 1882व, रकबा 0.7840 हेक्टेयर (करीब 9 बीघा) पर छह माह के लिए रिवर ड्रेजिंग की अनुमति मिली। तय सीमा मे 25,920 टन खनन होना था जिसकी तय रॉयल्टीकरीब 41 लाख रुपये थी
आरोप है कि कंपनी ने 9 बीघा नहीं, बल्कि करीब 62 बीघा जमीन को गड्ढों में बदल दिया। यानी 53.5 बीघा अतिरिक्त खनन कर दिया गया। जिसकी शिकायत स्थानीय किसानों जयराम, चेतराम, रमेश कक्कड़, पवन, ललित और गुड़्डी ने थाना श्यामपुर ओर रोशनाबाद जिला मुख्यालय में भी की थी। लेकिन सत्ता की हनक के चलते पीड़ित किसानों की कही कोई सुनवाई नही हुई। 9 बीघा की अनुमति पर तो 62 बीघा जमीन में अवैध खनन कर दिया गया। अब खनन पट्टे की अनुमति भी बीती 19 फरवरी को समाप्त हो चुकी है। लालच इस कदर हावी है कि अब निचली सेटिंग कर अवैध खनन के चक्कर मे ये कंपनी लगी है।
सवाल है कि अब प्रशासन क्या करेगा..? क्या सेटिंग कर अवैध खनन कराया जायेगा या पिछले हुए अवैध खनन पर जांच बैठा पर आरोपी कंपनी से वसूली की जायेगी। पीड़ितों की सुनवाई ओर न्याय कहां से मिलेगा।















































