03.05.2017 को पारित आदेश के तहत बंद किए जाने थे, किंतु फिर भी अवैध रूप से संचालित हो रहे थे
नैनीताल/ हरिद्वार।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रायवाला से भोगपुर व कुंभ मेला क्षेत्र में गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन के खिलाफ मातृ सदन हरिद्वार की जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ती रविन्द्र मैठाणी व न्यायमूर्ती पंकज पुरोहित की खण्डपीठ ने पूर्व के आदेशों का अनुपालन नहीं करने पर नाराजगी व्यक्त की है।
कोर्ट ने हरिद्वार में संचालित 48 स्टोन क्रशरों को तत्काल बंद करने व उनकी बिजली पानी के कनेक्शन काटने के आदेश जिला अधिकारी हरिद्वार व एसएसपी हरिद्वार को दिये हैं। कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है।
जानकारी के अनुसार रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है। जिससे गंगा नदी के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। गंगा नदी में खनन करने वाले नेशनल मिशन क्लीन गंगा को पलीता लगा रहे हैं। अब खनन कुंभ क्षेत्र में भी किया जा रहा है।
वही मातृ सदन ने बताया कि ये सभी स्टोन क्रशर पहले से ही माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 03.05.2017 को पारित आदेश के तहत बंद किए जाने थे, किंतु फिर भी अवैध रूप से संचालित हो रहे थे। यह आदेश मातृ सदन द्वारा दायर जनहित याचिका संख्या 15/2022 में माननीय खंडपीठ द्वारा पारित किया गया।
न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि पूर्व के आदेशों की अवहेलना कर इन स्टोन क्रशरों का संचालन कानून का उल्लंघन है।
माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड ने हरिद्वार के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को निर्देशित किया है कि वे इन सभी 48 स्टोन क्रशरों को तत्काल बंद कराएं तथा उनकी बिजली और पानी की आपूर्ति भी काट दी जाए। साथ ही, इसकी अनुपालन रिपोर्ट शीघ्र न्यायालय में प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए है।
मातृसदन, हरिद्वार



















































