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भारतीय सेना में भर्ती होने की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही

यश्विन का भारतीय सेना के ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में चयन
हरिद्वार।
भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का जुनून हर युवा में होता है लेकिन यह सुअवसर हर किसी को नहीं मिलता। जिसे मिलता है वो स्वंय को किस्मत वाला मिलता है। वहीं कुछ एेसे परिवार भी है जिनके यहां भारतीय सेना में भर्ती होने की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।
शा ीनगर ज्वालापुर निवासी पूर्व सैनिक हवलदार पदम बहादुर बम का पोता यश्विन ठकुरी का चयन भारतीय सेना मेे आईटीआई (ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी) में हो गया है। आगामी 1 जुलाई से गया (बिहार) में प्रशिक्षण प्रारंभ हो जायेगा। भारतीय सेना की वर्दी पहनने वाला यश्विन बम ठकुरी ‘बम’ परिवार की तीसरी पीढ़ी का सदस्य है। उसकी यह उपलब्धि मात्र परिवार के लिये ही नहीं है अपितु हरिद्वार के लिये भी बड़े ही फक्र की बात है। शुक्रवार को जैसे ही यश्विन का ओटीपी से काल लेटर आया परिवार में खुशी की लहर दौड$ गयी। 1 जुलाई से प्रारंभ होने वाले ओटीए (आफिसर्स ट्रेनिंग एकादमी) प्रशिक्षण  में जाने से पूर्व देर रात्रि शा ीनगर (ज्वालापुर) स्थित अपने दादाजी हवलदार पदम बहादुर बम एवं परिवार के वरिष्ठ सदस्यों से आशीर्वाद लेने पहुंचे यश्विन बम का सदस्यों ने आतीशबाजी, पुष्प गुच्छ देने के साथ ही खादा पहनाकर स्वागत किया।
ज्ञात रहे कि इससे पूर्व यश्विन के तीन दादा जी भारतीय सेना में रह चुके हैं। जिन्होंने सन् 1961, 1962, 1965, 1971 के युद्ध में भागीदारी निभाई। वहीं यश्विन के पिता गणेश बहादुर व चाचा भीम बहादुर दोनों ही भारतीय वायु सेना में सेवारत रह चुके हैं, जो कि कारगिल युद्ध (1998)के समय भारतीय सेना के हिस्सा रहे हैं।
यश्विन ठकुरी के दादा जी और पूर्व सैनिक पदम बहादुर जिन्होंने भारतीय सेना में 24 वर्ष सेवाएं दी ने बताया कि हमारे परिवार की दिली तमन्ना थी कि परिवार की सैन्य परंपरा बनी रहे। आज यश्विन ने उसी परंपरा का निर्वहन करते हुये भारतीय सेना का हिस्सा बन गया है। यश्विन ने दसवी 95 प्रतिशत एवं इंटर की परीक्षा 86 प्रतिशत अंको के साथ उत्तीर्ण की। उसने गत वर्ष ही देहरादून स्थित ग्राफिक एेरा कालेज में बी—टेक प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था।
इससे पूर्व यश्विन एनडीए की लिखित प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ ही एसएसबी के अंतिम चरण में असफल हो गया था।

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