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स्वामी विवेकानंद जी के162 वे जन्मोत्सव पर की रोगियों की पूजा

हरिद्वार।
रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम कनखल में शुक्रवार को पंचांग तिथि के अनुसार स्वामी विवेकानंद का162वां जन्मोत्सव रोगी नारायण सेवा के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों में नारायण का रूप मानकर उनकी पूजा अर्चना की गई उनके माथे में तिलक लगाया गया और फल वितरित किए गए। मुख्य अतिथि  के रूप में रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के सचिव स्वामी दयामूत्र्यानन्द महाराज ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युगपुरुष थे। उन्होंने मानव कल्याण के लिए नर सेवा नारायण सेवा का जो मूल मंत्र दिया, उसी अनुसार आज भी रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के देश—विदेश में स्थित सभी आश्रमों, चिकित्सालयों और सेवा संस्थानों में स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन नर सेवा नारायण सेवा के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार हर युग में प्रासंगिक रहेंगे। स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के युग निर्माता और युगपुरुष थे। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद पर शोध कार्य करने वाली लेखिका, विचारक, ङ्क्षचतक डाक्टर राधिका नागरथ ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने पूरे विश्व में भारत की एक नई पहचान प्रस्तुत की थी। स्वामी जी का शिकागो उदबोधन पूरे विश्व को एक नई प्रेरणा दे गया और उसने लोगों को झकजोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्व के वर्तमान माहौल में स्वामी जी के विचारों पर चलकर ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। श्री निर्मल पंचायती अखाड$ा के मुकामी महंत गुरमीत ङ्क्षसह ने कहा कि भारत एक युवा देश है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के बताएं मार्ग पर सबको चलना चाहिए जब तक अपना उद्देश्य ना पूरा हो तब तक निरंतर अपने निर्धारित रास्ते पर चलते रहो। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह ध्यान जप योग मंगल आरती संतो के प्रवचन भजन कीर्तन के साथ शुरू हुआ। स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमाओ पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अॢपत की गई। इस अवसर पर सुनील मुखर्जी, स्वामी जगदीश महाराज, उमेश्वरानंद मंजू महाराज, स्वामी निमई महाराज, स्वामी देवानंद महाराज, स्वामी कमलाकांतानंद महाराज, स्वामी एकाश्रयानंद महाराज, स्वामी मोहनानंद महाराज, चिकित्सक डा. समरजीत चौधरी, डा. वालिया, अरुण मेहता, कमलेश शर्मा, डा. दीपक, डा. मधु शाह, एम्स ऋषिकेश से आई डाक्टर अरुणिमा,  डाक्टर विनोद, नॄसग सुपरीटेंडेंट मिनी योहानन्न, गोकुल ङ्क्षसह आदि मौजूद थे।

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