हरिद्वार।
यू तो हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण जनपद हरिद्वार को सुव्यवस्थित सुंदर और विकसित बनाने के लिए स्थापित किया गया था। लेकिन इसकी कार्यशैली पर लगातार प्रश्नचिन्ह लग रहे है। हरिद्वार शहर में ही सेकड़ो ऐसे भवन निर्माण प्राधिकरण की छत्रछाया में बन चुके है जो कोई भी मानक पूरा नही करते है।
हाल ही में ऐसे कई ज्वलंत शील मामले वर्तमान में भी जारी है।
जिसमे ट्रस्ट की सम्पतियों पर काटी जा रही अवैध कॉलोनी को सीज करने के बजाय उसका कालोनी का मानचित्र प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत कर दिया गया।
हरे भरे बागों में भी कॉलोनी के मानचित्र प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत कर दिए गए। इतना ही नही राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के आदेशो को भी ताक पर रखकर गंगा किनारे होटलो के मानचित्र स्वीकृत कर कई कई मंजिला होटल बनवा दिए गए।
शहर में ही डूब क्षेत्र मध्य हरिद्वार में लगातार बेसमेंट बनवाये जा रहे है। जिससे साफ जाहिर होता है कि विकास प्राधिकरण विकास का नही विनाश का प्राधिकरण बन चुका है। बीते दो सप्ताह पूर्व प्राधिकरण के सचिव ने जनहित में अपना एक वीडियो बना कर वायरल किया था। जिसमे उन्होंने शिकायत कर्ताओ से अपने आस पास बन रहे अवैध भवन निर्माणों की शिकायत करने के लिए फ़ोन नम्बर जारी किया था। इस कार्य के लिए मीडिया द्वारा सराहना की गई। लेकिन अधिनस्त कर्मचारियों के मुंह खून लग चुका है तो घास कैसे खाये। ये फोन प्राधिकरण की किसी महिला कर्मचारी द्वारा उठाया जाता है। लेकिन शिकायत करता कि किसी भी शिकायत का कोई संज्ञान इसमे आज तक नही लिया गया है। जिससे साफ जाहिर होता है कि प्राधिकरण के कर्मचारी जहां उगाई के लिए नही पहुच सकते वहां की जानकारी उन्हें इस फोन नम्बर के माध्यम से मिल रही है।
मध्य हरिद्वार के ही कई भवनों में पार्किंग के नाम पर अवैध रूप से बनाये गए बेसमेंट में व्यवसायिक गतिवधियां चल रही है। प्राधिकरण का हाल बिल्ली को देख कर कबूतर आंखे बंद कर लेने जैसा है। अब देखना होगा प्राधिकरण के कर्मचारी अपने निजी स्वार्थ त्याग कर हरिद्वार के विकास के लिए कार्य करेगे। या विकास प्राधिकार विनाश प्राधिकरण के रूप में जाना जायेगा। सरकार की छवि को पलीता लगाने का कार्य प्राधिकरण के कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है।
















































