केन्द्र सरकार के चार श्रम कोड के विरोध में श्रमिक यूनियनों का प्रदर्शन 26 /11 को
हरिद्वार।
केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों एवं संयुक्त किसान मोर्चा के केन्द्रीय आह्वान पर जनपद में सक्रिय ट्रेड यूनियनों की संयुक्त बैठक इन्टक कार्यालय भेल में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता एटक के प्रांतीय अध्यक्ष एमके त्यागी व संयोजक राजबीर सिंह रहे।
बैठक में विशेष तौर पर भारत सरकार के द्वारा चार श्रम कोड 1— मजदूरी संहिता 2१९, 2— सामाजिक सुरक्षा सहिता 2२0, 3— औद्योगिक सम्बन्ध संहिता 2२0 एवं 4— उपजीविकाजन्य सुरक्षा स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2२0 पर चर्चा की गई। बताया कि सरकार द्वारा इन बिलो को सांसद के निकासन के उपरान्त जबरी संसद में पास कराकर कानून बनाने की प्रकिया के समय से ही ट्रेड यूनियनों मजदूरों द्वारा निरन्तर विरोध किया जा रहा था। केन्द्र सरकार द्वारा संशोधित चार श्रम संहिताआे को रद्द किये जाने व अल्प वेतन भोगी कर्मचारी के जीवन जीने के लिये न्यूनतम वेतन रू$ 26 हजार रूपये निर्धारित किये जाने तथा पूर्व में बने कानूनों को यथावत बनाये रखने की मांग की जाती रही है। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2२0 से ट्रेड यूनियनों/ मजदूरो के विरोध की अनदेखी करते हुये बिना ट्रेड यूनियनों/ मजदूरों के संगठनों से उक्त चारों संहिताआें के सम्बन्ध में विचार-विमर्श किये बिना ही दिनांक 2१ नवम्बर 2२५ को राजाज्ञा जारी कर दी गई। इस तरह उद्योगपतियो को लाभ पहुचानें के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा बनाये गये चार श्रम कोड लागू कर दिये गये। जिससे श्रमिकों को पूर्व के कानूनो में दिये सुरक्षा कवच को केन्द्र सरकार द्वारा छीन लिया गया है। इन नये कोडो में न तो न्यूनतम वेतन की गणना का कोई आधार दिया गया है। जिसमें प्रतिदिन प्रति घन्टे प्रति महीने और पीस रेट पर न्यूनतम मजदूरी की दर तय करने का अधिकार राज्य केन्द्र सरकार के हाथों को देता है। काम के घन्टे भी सरकारों द्वारा निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। निश्चित अवधि के रोजगार को कानूनी रूप दे दिया गया है जिससे स्थाई रोजगार समाप्त हो जायेगें। श्रम न्यायालय मात्र सलाहकार बोर्ड बन कर रहे जायेगे। उनके द्वारा दिये गये कोई आदेश मानने के लिये सेवायोजक बाध्य नही होगा। श्रमिकों को संगठन बना कर अपने अधिकारों की रक्षा करने व सौदे बाजी करने हेतु यूनियन बनाने को कठिन बना दिया गया जो श्रमिको के लोकतान्त्रिक अधिकारो पर हमला है। पुराने कानून हर सैक्टर के विशेष कार्य दशाआें , समस्याआें एवं मुद्दो को ध्यान में रखते हुये बनाये गये अब इस नये कोड में सभी सैक्टरो के लिये एक ही मॉडल रखा गया है। कोड कवरेज को कम करके असंगठित क्षेत्र के अधिकांश श्रमिको को कवरेज से बाहर कर दिया गया है एवं ठेका प्रथा को बढावा देता है। उक्त संहिताआे से श्रमिकों बढ$ते हमले के विरोध में चर्चा करते हुये वक्ताआें द्वारा केन्द्रीय आह्वान पर दिनांक 26 नवंबर को सक्रिय ट्रेड यूनियनो द्वारा विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का निर्णय लिया गया। जिसके तहत 26 नवंबर 0 को फाउंड्री गेट भेल हरिद्वार पर शाम 4:0 बजे चार श्रम संहिताआें का पुतला दहन तथा मोटर साईकिल रैली द्वारा नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय हरिद्वार पर प्रदर्शन के माध्यम से महामहीम राष्ट्रपति भारत सरकार को ज्ञापन दिये जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में केंद्रीय श्रम संगठनों में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू , निफ्टू , आईएमके से सम्बंधित भेल हरिद्वार, जिला, राज्य स्तरीय प्रमुख प्रतिनिधि राजबीर सिंह, रामयश सिंह, एके दास, एमएस त्यागी, महेंद्र जखमोला, पीडी बलोनी, मुकुल राज, रविंद्र कुमार, प्रशान्त दीप गुप्ता, विकास सिंह, रवि कश्यप, नईम खान, परमाल सिंह, अमृत रंजन, अजीत सिंह, राजकिशोर, अवधेश कुमार, सत्यवीर सिंह, अशोक चौधरी, रजनीश कुमार, प्रेमचंद, हंसराज कटारिया, अशोक शर्मा, सिडकुल के श्रमिक एवं किसान यूनियन नेतागण उपस्थित रहे।

















































