उत्तराखंड हरिद्वार

भाजपा प्रत्याशी त्रिवेंद्र सिंह रावत 164056 मतों से विजयी

हरिद्वार।
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने लगातार तीसरी बार उत्तराखंड की पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर इतिहास रचा है। हरिद्वार लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व सीएम हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत को 1 लाख 64 हजार 56 मतों के अंतर से हराया है। निर्दलीय प्रत्याशी उमेश कुमार तीसरे नंबर पर रहे। राज्य के मुख्यमंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहली बार लोस चुनाव लड़ा और शानदार जीत हासिल की। त्रिवेंद्र सिंह रावत को 6,53,88 और कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र रावत को 4,89,752 वोट मिले। जबकि तीसरे स्थान पर खानपुर विधानसभा के विधायक पत्रकार उमेश कुमार को 9१ हजार 188 वोट मिले, वही चौथे स्थान पर बसपा के प्रत्याशी जमील अहमद रहे। इन्हें महज 42323 वोट ही मिले। इने अलावा कोई की प्रत्याशी तीन हजार का आंकड़ा भी पार नही कर पाया।
उत्तराखंड समता पार्टी के बलवीर सिंह भंडारी को 2961, उत्तराखंड क्रान्ति दल के मोहन सिंह असवाल को 2854 तथा निर्दलीय विजय कुमार को 2410,पवन कश्यप को 2176, करन सिंह सैनी इंजीनियर को 1974, अकरम हुसैन को 1685, ललित कुमार को 1410, सुरेश पाल को 1162, आशीष ध्यानी को 1117, अवनीश कुमार को 975 मत हासिल हुए। जबकि इन प्रत्याशियों से कहीं अधिक 6826 मत नोटा को मिले है।

मेरी नही जनता की जीत है : रावत
हरिद्वार।
नवनिर्वाचित सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जीत के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए अपनी जीत का श्रेय हरिद्वार की जनता को दिया है। उन्होंने कहा कि जनता ने जिस तरह उन्हें प्यार और आर्शीवाद दिया है, वह सदैव उसके ऋणी रहेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रत्याशी के रुप में यह जीत भाजपा के हर उस कार्यकर्ता की है जिन्होंने दिन रात एक कर चुनाव में महेनत की। उन्होंंने अपनी जीत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह व अध्यक्ष जेपी नड्डा का भी आभार व्यक्त करते हुए शुभकामानाएं दी है। उन्होंने प्रदेश की अन्य सीटों पर जीत दर्ज करने वाले पार्टी प्रत्याशियों को भी बधाई दी और कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनेगी।

हरिद्वार में टीएसआर का वनवास हुआ समाप्त
हरिद्वार।
उत्तराखंड का चार साल मुख्यमंत्री रहने के बाद एकाएक मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाये जाने के बाद से राजनीतिक वनवास झेल रहे त्रिवेन्द्र सिंह रावत को मां गंगा ने आर्शीवाद दे दिया है। राज्य की राजनीति में हासिये पर जाने के बाद से त्रिवेन्द्र सिंह रावत अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं से खफा रहने लगे थे। कई बार उनसे पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट रुप से कहा भी कि  मेरी गलती क्या है, मुझे ही नही मालूम। मुख्यमंत्री पद से हटाने जाने के बाद त्रिवेन्द्र ने 2022 विधानसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। अपने राजनीतिक वजूद की तलाश त्रिवेन्द्र को हरिद्वार खींंच लाई। यहां से पार्टी ने दो बार से सांसद रहे पूर्व मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक का टिकट काट कर त्रिवेन्द्र को प्रत्याशी बनाया। जिन्होंने आज जीत हासिल कर हरिद्वार की पावन भूमि से संसद में जाने का सफर तय करते हुए अपने लगभग तीन वर्ष के वनवास को भी समाप्त किया है।

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