उत्तराखंड राजनीति हरिद्वार

प्रशासनिक लापरवाही या राजनैतिक संरक्षण

हरिद्वार।
भीम गोडा स्थित रामलीला भवन पर स्थानीय नेताओं द्वारा किए गए कब्जे को लेकर वर्षों से विवाद की स्थिति उत्पन्न होती रही है। बीते वर्ष भी रामलीला आयोजन के दौरान ही रामलीला भवन परिसर में ही दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष भी हुआ था। जिसमें भगदड़ मचने से कई लोग घायल हो गए थे। स्थानीय लोगो द्वारा भी रामलीला भवन और उसके आसपास के क्षेत्र पर स्थानीय नेताओं द्वारा कराए जा रहे कब्जों को लेकर जिला प्रशासन को कई बार पत्र भी दिया जा चुका है। बावजूद उसके कभी-कभी नगर निगम की टीम हल्का-फुल्का अतिक्रमण हटा देती है, जो बाद में फिर से कायम हो जाता है। बताया कि इस संबंध में कई बार सिटी मजिस्ट्रेट को भी लिखित में दिया गया। लेकिन वह कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं करती है। उनका कहना है कि रामलीला भवन और उसके आसपास के क्षेत्र पर कब्जा करने वाले कब्जाधारीयो द्वारा उन्हें भी कई बार धमकियां दी जा चुकी है। ताजा मामला सभी के सामने है बीते सोमवार को करीब 2 घंटे मारपीट गाली गलौज और संघर्ष जारी रही। जिसमें कुछ पुलिसकर्मी बीच बचाब करते नज़र तो आये लेकिन उन पुलिस के साथ भी ऐसा ही बिहेव किया गया जैसा आस् पड़ोस के मोहल्ले वाले बीच बचाव करने आते हैं। यह कैसी मित्र पुलिस है जिससे मारपीट और हंगामा करने वाले लोग भी विचलित नहीं हुए। वहीं इसके बाद जब वीडियो वायरल होने लगी तो स्थानीय पार्षद पूर्व पार्षद को फोन पर मारने की धमकी देते हुए सुनाई दे रहे हैं जिससे साफ पता चलता है उत्तरी हरिद्वार में ला एंड ऑर्डर नाम का कोई नियम पालन नहीं किया जा रहा है। कानून ओर उसका पालन कराने वाली पुलिस भी इन जानवरो की तरह लड़ते कथित जनप्रतिनिधियों के आगे बेब्स नज़र आ रही है। धमकी मिलने वाले ओर कालनेमियों के कोप का भाजक बने युवा संत का दोष केवल इतना है की वह उस सरकारी सम्पति को बचाने के लिए इन भूमफिया अतिक्रमणकारियों से जूझ रहे है जो नगर निगम हरिद्वार की है। ये धमकिया देने वाला कोई साधारण सामाजिक व्यक्ति नहीं बल्कि सत्ता के मद मे चूर उस वार्ड से भाजपा का पार्षद है।

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