हरिद्वार।
पुरानी कहावत है जब मेढ़ ही खेत खाने लगे तो बर्बादी होनी तय है ऐसा ही वर्तमान में देखा जा रहा है।
जिले में अवैध खनन की गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अवैध खनन रोकने के लिए सरकार ने जिस प्राइवेट कंपनी को प्रदेश में ठेका दिया अब कंपनी कैलाश रिवर बैंड कंपनी के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे मिलीभगत से अवैध खनन को बढ़ावा दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कंपनी के उड़न दस्ते के कर्मचारी खनन स्थलों पर मौजूद रहकर ओवरलोड डंपरों को बिना वजन जांचे रॉयल्टी जारी करवा रहे हैं, जिससे सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
शिकायतों में बताया गया है कि डंपरों की पंजीकृत क्षमता 16, 18 या 22 टन है, लेकिन मौके पर बिना किसी धर्मकांटे (वजन मापने की मशीन) के ही इन वाहनों में क्षमता से कहीं अधिक अवैध खनन सामग्री लादी जा रही है। कर्मचारी खुद रॉयल्टी प्रिंट की जांच कर अपने रजिस्टर में एंट्री कर रहे हैं, जो स्पष्ट रूप से मिलीभगत का संकेत देता है। इससे न केवल पर्यावरण को खतरा है, बल्कि सरकार को मिलने वाली रॉयल्टी में भारी कमी आ रही है।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि “कैलाश रिवर के कर्मचारी खनन साइट पर बैठे रहते हैं और ओवरलोड डंपरों को हरी झंडी देते हैं। बिना वजन किए 20-25 टन तक खनन सामग्री ले जाई जा रही है, जबकि खनन सामग्री। का परिवहन करने वाले वाहनों की क्षमता रॉयल्टी में अंकित खनन सामग्री के कई कुंतल कम है, इतना ही नहीं मौके पर जहां खनन कार्य किया जाता है कोई धर्म कांटा भी नहीं लगाया जाता है। जिससे स्पष्ट जाहिर होता है कि कंपनी कर्मचारियों ओर छोटे अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध खनन करवाया जा रहा है। लालढांग रवासन नदी में वर्तमान में चल रहे खनन कार्य पर भी धर्म कांटा मौके पर नहीं लगाया गया, जबकि रॉयल्टी मौके पर वाहनों को दी जा रही है।बीते माह ग्राम कटारपुर चांदपुर जैसे क्षेत्र में मिट्टी का खनन किया गया। वैध अनुमति की आड़ में अवैध गतिविधियां चला रही हैं। कैलाश रिवर बैंड, जो खनन की निगरानी के लिए नियुक्त है, खुद इस घोटाले में शामिल पाई जा रही है। कि शिकायत जिलाधिकारी को भी प्रेषित की गई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन वहां से भी अवैध खनन के विरुद्ध कोई कारवाही नहीं की गई। जिले के सबसे वरिष्ठ अधिकारी के द्वारा भी अवैध खनन के विरुद्ध कारवाही न किया जाना सवालों को जन्म देता है।
वही जब इस संबंध में जिला खान अधिकारी से बात की गई तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। जिला खान अधिकारी काजिम रज़ा ने बताया कि मिट्टी के खनन पर धर्मकांटा नहीं होता, कंपनी कैलाश रिवर के कर्मचारी मौके पर होते है यदि उन्हें लगता है कि खनन परिवहन करने वाले वाहन में क्षमता से अधिक सामग्री ले जा रहा तो उसका किसी भी कांटे पर वजन करा लिया जाता है। बताया कि कैलाश रिवर द्वारा समय समय पर अवैध खनन परिवहन करने वाले वाहनों पर कारवाही की जाती है, उन पर पेनल्टी भी लगाई जाती है। जब उन्हें परिवहन करने वाले वाहनों की क्षमता बताई गई तो उन्होंने गेंद संभागीय परिवहन विभाग के पाले में डालने का प्रयास किया। कहा कि आरटीओ कारवाही करे।
जिला खान अधिकारी के जवाब से तो पता चलता है कि कैलाश रिवर कंपनी के उड़ान दस्ता कर्मचारियों की आंखों में ही धर्मकांटा प्रत्यर्पण किया गया है वह देख कर ही पता कर लेते है किस परिवहन वाहन में कितनी खनन सामग्री भरी है,,
सवाल अब भी बरकार है
यदि खनन किए जाने वाले स्थान पर धर्मकांटा नहीं है तो रॉयल्टी में प्रिंटेड खनन सामग्री का वजन कैसे किया गया..?
अतिरिक्त खनन सामग्री का सीधा अर्थ लाभ किसी जेब में जा रहा है..?
















































