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महानवमी पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने किया 121 कन्याओं का पूजन

हरिद्वार।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज के संयोजन में शारदीय नवरात्रि की नवमी पर श्रवणनाथ मठ में महानवमी एवं वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने श्रवणनाथ घाट गंगा तट पर पूर्ण विधि विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ देवी स्वरूपा 121 कन्याओ का पूजन किया। पूजन के उपरांत श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कन्याओं को अपने हाथों से भोजन कराया, उपहार एवं दक्षिणा भेंट की और चरण छूकर आशीर्वाद लिया। श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि नवरात्रि के नौवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माता दुर्गा का यह स्वरूप सिद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला है। इसलिए माता को मां सिद्धिदात्री कहा जाता है। मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि कन्या पूजन नवरात्र आराधना का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। कन्या पूजन से ही नवरात्र साधना की पूर्णाहूति होती हैं। नौ दिन तक देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के उपरांत कन्या पूजन करने से साधक को सम्मान, लक्ष्मी, विद्या और तेज प्राप्त होता है। भारत माता मंदिर के महंत महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी एवं महंत दर्शन भारती ने कहा कि महानवमी देवी दुर्गा द्वारा राक्षस महिषासुर के खिलाफ नौ दिनों तक चले युद्ध की परिणति है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और विजयादशमी पर नए प्रयासों की शुरुआत के लिए इसे शुभ माना जाता है। कार्यक्रम में सभी तेरह अखाड़े के संत महापुरूष और बडी संख्या में श्रद्धालुजन शामिल हुए। महंत राज गिरी, स्वामी रघु वन, स्वामी रवि पुरी, महंत सतीश वन ने सभी संतों और अतिथियों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान निरंजनी अखाड$े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि, एसएमजेएन कालेज के प्राचार्य डा. सुनील कुमार बत्रा, मनसा देवी मंदिर के ट्रस्टी अनिल शर्मा सहित अनेक संत, गणमान्य लोग व श्रद्धालु भक्त शामिल रहे।

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