मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस को FIR दर्ज करने का दिया आदेश
हरिद्वार।
उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के श्यामपुर थाना क्षेत्र में स्थित सकलैनी जामा मस्जिद में इमाम की नियुक्ति को लेकर चले आ रहे विवाद में एक बड़ा मोड़ आया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय रोहित कुमार पांडेय ने 18 सितंबर को जारी आदेश में थानाध्यक्ष श्यामपुर को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता मोहम्मद यूसुफ की शिकायत पर विपक्षियों के खिलाफ संबद्ध धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच सुनिश्चित करें। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) के तहत दिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि में, याचिकाकर्ता मोहम्मद यूसुफ (पुत्र मीर अली, निवासी गुज्जर बस्ती, गंडीखाता, श्यामपुर) ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ प्रभावशाली व्यक्ति, जिनमें गाजीवाली गांव के प्रधान देवेंद्र सिंह नेगी, उनके भाई कांस्टेबल राजेंद्र सिंह नेगी और अन्य जैसे रोशनदीन, सुल्तान, नौमान, मसरद्दीन, दानिश, आरिफ, शमशाद और नूर जमाल शामिल हैं, ने मस्जिद की जमीन और संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश रची। उन्होंने पुराने इमाम इनाम अली को जबरन हटाकर शमशाद (पुत्र वजीर) को नया इमाम नियुक्त कर दिया।
याचिका में कहा गया है कि गांववासियों ने इस नियुक्ति का विरोध किया, जिसके बाद विपक्षियों ने धमकियां दीं। 1 मार्च 2025 को रमजान के दौरान तरावीह नमाज के समय मस्जिद में प्रवेश रोकने और मारपीट की घटना हुई, जिसमें यूसुफ और इरशाद (पुत्र गुलाम रसूल) को गंभीर चोटें आईं। इरशाद का दांत भी टूट गया। घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी गई, लेकिन पुलिस ने कथित तौर पर विपक्षियों का साथ दिया और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ ही कार्रवाई की।
पुलिस की आख्या में बताया गया कि इमाम शमशाद पिछले एक साल से मस्जिद में हैं और 1 मार्च की घटना पर उनके बयान के आधार पर मुकदमा संख्या 22/2025 (धारा 115(2), 190, 191(2), 191(3), 351(3), 352 BNS) दर्ज किया गया, जिसमें यूसुफ सहित विरोध करने वाले नामजद हैं। आख्या में यह भी कहा गया कि गांववासियों ने मस्जिद में पत्थरबाजी की। हालांकि, तहसीलदार और थानाध्यक्ष ने बैठक कर रमजान तक यथास्थिति बनाए रखने और बाद में कमेटी गठित कर इमाम चुनने की अपील की थी।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चोटें ठोस या कुंद हथियार से लगी हैं, जो घटना की पुष्टि करती हैं। मजिस्ट्रेट ने प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाया और पुलिस को जांच का आदेश दिया। आदेश की प्रति थानाध्यक्ष को भेजी गई है और CIS पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
याचिकाकर्ता के वकील प्रतीक वासन ने कहा कि यह फैसला न्याय की जीत है, जबकि विपक्षियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। यह मामला स्थानीय राजनीति, पुलिस प्रभाव और धार्मिक स्थलों पर कब्जे की बहस को फिर से गरमा सकता है। पुलिस जांच के नतीजे पर सबकी नजरें टिकी हैं।

















































