केदारनाथ गर्भ गृह स्वर्ण जणित करने के मामले पर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों के समर्थन में आयी अखिल भारतीय युवा तीर्थ पुरोहित महासभा
हरिद्वार।
अखिल भारतीय युवा तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष उज्जवल पंडित ने बताया कि उत्तराखंड के चार पवित्र धामों में से बाबा केदारनाथ धाम में गर्भ ग्रह को स्वर्ण जड़ित करने को लेकर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों का विरोध लगातार चल रहा है। इसमें हमारा ऐसा मानना है सरकार एवं स्थानीय प्रशासन को सभी पहलुओं पर विचार विमर्श करना चाहिए। जो स्थानीय तीर्थ पुरोहित हैं उनको उस स्थान की पौराणिक महत्वता, परंपराएं, वहां होने वाली सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का भली-भांति जानकारी रहती है। इसलिए सरकार को कोई भी छेड़छाड़ करने से पूर्व सभी को विश्वास में लेना चाहिए।
वही इसका धार्मिक पहलू यह है की भगवान शिव भूतनाथ हैं उनको भस्म प्रिय है। रजत और स्वर्ण अन्य देवी-देवताओं के लिए प्रिय हो सकते हैं लेकिन भगवान शिव उससे इतर हैं। आपको याद होगा समुद्र मंथन के समय जब विभिन्न रत्न एवं द्रव्य उस मंथन से निकले तो भगवान शिव ने ‘विष’ को स्वीकार किया। वही आप देखते हैं दक्षिण के जितने भी मंदिर है तिरुपति बालाजी है, पद्मनाभ है, जगन्नाथ मंदिर है वहां पर स्वर्ण बहुतायत में चढ़ाया जाता है स्वर्ण भगवान विष्णु को प्रिय है अन्य प्रकार के आभूषण भी अन्य देवी-देवताओं को प्रिय है इसलिए इन विषयों को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है। भगवान शिव के प्राचीन मंदिर में जिस प्रकार की उसकी भव्यता और पौराणिकता बनी हुई है वह बनी रहे। उन्होंने आशंका व्यक्त की की अति उत्साह एवं आधुनिकता के आबोहवा में वहां की सकारात्मक ऊर्जा क्षीण ना हो जाए इसको भी चिंता करने की आवश्यकता है।




















































