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बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताएं, अधिवक्ताओं में रोष

 

देहरादून/हरिद्वार।

उत्तराखंड के अधिवक्ता समुदाय में बर काउंसिल ऑफ उत्तराखंड द्वारा जारी की गई वर्तमान मतदाता सूची को लेकर भारी असंतोष फैल गया है। सूची में मृत अधिवक्ताओं के नाम शामिल होने के साथ ही कई जीवित, सक्रिय और प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं के नाम बिना किसी पूर्व सूचना या कारण बताए हटा दिए गए हैं। इससे आगामी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अधिवक्ताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई एडवोकेट्स एक्ट, 1961, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों तथा भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों का उल्लंघन है। विशेष रूप से   अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय या पेशा करने की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 21(जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है। बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए या सुनवाई का अवसर दिए नाम काटना प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांत (Audi Alteram Partem – दूसरी पक्ष को सुनो) के विरुद्ध है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराना संवैधानिक रूप से स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी निर्वाचन की अवधारणा को कमजोर करता है, जिससे पूरा चुनाव प्रक्रिया विवादास्पद हो सकता है।

रूल ऑफ लॉ एंड जस्टिस फाउंडेशन के अध्यक्ष तथा हरिद्वार जिला न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने ईमेल के माध्यम से बर काउंसिल को पत्र भेजकर तत्काल सुधार की मांग की है। उन्होंने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

1. मृत अधिवक्ताओं के नाम तुरंत मतदाता सूची से हटाए जाएं।

2. जिन योग्य और पात्र अधिवक्ताओं के नाम अनुचित तरीके से काटे गए हैं, उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाकर पुनः शामिल किया जाए।

3. पूरी मतदाता सूची की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

4. संशोधित मतदाता सूची जारी कर अधिवक्ताओं से आपत्तियां आमंत्रित की जाएं।

अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया तथा अन्य सक्षम संवैधानिक मंचों के समक्ष उठाया जाएगा। ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरणों पर होगी।

 

 

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