सूचना आयोग का सख्त कदम: HRDA पर 10 हजार का जुर्माना, गंगा बाढ़ जोन में अवैध निर्माणों पर छाई अनदेखी
हरिद्वार/ कालू वर्मा।
उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) पर सूचना के अधिकार (RTI) नियमों के उल्लंघन के लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई अधिशासी अभियंता टी.पी. नौटियाल पर लगी है, जिन्होंने वर्ष 2020 से लंबित अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण और पुलिस चौकी के पुनर्निर्माण से जुड़ी सूचनाएं देने में देरी की। जुर्माना राशि की वसूली उपाध्यक्ष द्वारा 2013 की नियमावली के तहत की जाएगी। इस मामले ने गंगा नदी के बाढ़ जोन क्षेत्र में हो रहे बड़े पैमाने के अवैध निर्माणों का पर्दाफाश किया है, जिसमें पूर्व उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री के निर्माण भ्रष्टाचार का भी खुलासा हुआ है।
सामाजिक कार्यकर्ता और राष्ट्रीय सूचना अधिकार जागृति मिशन के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने 12 दिसंबर 2023 को HRDA को एक RTI आवेदन दिया था। इसमें उन्होंने मांग की थी कि हाईकोर्ट और एनजीटी द्वारा नीलधारा गंगा नदी के बाढ़ जोन क्षेत्र तथा हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड जलधारा किनारे लगाए गए सख्त निर्माण प्रतिबंधों के बावजूद हर की पौड़ी से डामकोठी तक तथा बाढ़ जोन में हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की पूरी जानकारी दी जाए। साथ ही, हर की पौड़ी पर रोटरी क्लब द्वारा 1992 में नगर पालिका की आवंटित भूमि पर बिना अनुमति के बनाए गए दो कमरों वाली पुलिस चौकी के भवन का 2 करोड़ से अधिक राशि से पुनर्निर्माण के लिए शासन से प्राप्त शिथिलता आदेश की भी मांग की गई थी।
HRDA ने पुलिस चौकी के पुनर्निर्माण पर कोई जानकारी नहीं दी। वहीं, नीलधारा नदी के बाढ़ जोन में गाजीवाला ग्राम से सटी गंगा किनारे हो रहे विशाल अवैध निर्माण (वाद संख्या 209/18/19) के संबंध में आधी-अधूरी जानकारी 1 जुलाई 2020 को सचिव द्वारा उपाध्यक्ष को दी गई। शर्मा ने बताया कि ध्वस्तीकरण की सिफारिश सहित मांगे गए अनुमोदन रिकॉर्ड में अधिशासी अभियंता टी.पी. नौटियाल ने पत्र संख्या 648 (3 मई 2025) में सिंचाई खंड हरिद्वार के अनापत्ति पत्र का हवाला देते हुए निर्माण स्थल को मनोरंजन उपयोग का बताया और आवासीय निर्माण को अस्वीकार्य करार दिया। उन्होंने गंगा नदी की निकटता का उल्लेख कर शमन प्रार्थना पत्र को निरस्त करने तथा ध्वस्तीकरण की अनुशंसा की।
तहसीलदार की 18 जून 2019 की रिपोर्ट में श्री यतीश्वरानंद (शिष्य स्वर्गीय जगदीश्वरानंद) का ग्राम गाजीवाला, तहसील हरिद्वार के खसरा नंबर 93 (क्षेत्रफल 371.72 वर्ग मीटर) पर मालिकाना हक सिद्ध हुआ, जो विक्रय पत्र (पंजीकरण संख्या 4703) और दानपत्र (पंजीकरण संख्या 4704, 20 जुलाई 2018) से प्रमाणित है। जांच रिपोर्ट (2 जनवरी 2019) के बाद सचिव ने 1 जुलाई 2020 को उपाध्यक्ष से ध्वस्तीकरण का अनुरोध किया था, लेकिन कार्रवाई लंबित रही।
इन अपूर्ण सूचनाओं के खिलाफ शर्मा ने सूचना आयोग में दूसरी अपील (संख्या 41109) दायर की। आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने प्रथम आदेश 5 मई 2025 और दूसरा 2 जून 2025 को जारी किया, जबकि अंतिम नोटिस 29 जुलाई 2025 को जुर्माना लगाने का था। इसके बावजूद सूचनाएं न देने पर 12 अगस्त 2025 को 10 हजार का जुर्माना लगाया गया। शर्मा ने कहा, “यह फैसला RTI के दुरुपयोग पर लगाम लगाने वाला है। गंगा के पवित्र घाटों पर भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं, और पूर्व मंत्री के निर्माण भ्रष्टाचार का खुलासा अब सबके सामने है।”
HRDA ने अवैध निर्माणों पर सख्ती दिखाई है, जैसे हाल ही में भूपतवाला और कनखल में सीलिंग की कार्रवाई, लेकिन बाढ़ जोन मामलों में देरी ने सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एनजीटी के आदेशों का पालन न होने से पर्यावरणीय खतरा बढ़ रहा है। प्राधिकरण से जुर्माने पर टिप्पणी की प्रतीक्षा की जा रही है।


















































