रुड़की।
जहाँ एक तरफ पूरा देश देशभक्ति के रंग में डूबा था, तिरंगे को सलामी दे रहा था, वहीं रुड़की में भ्रष्टाचार का एक ऐसा खेल खेला गया जिसने राष्ट्रीय पर्व की गरिमा को तार-तार कर दिया है।
मामला मनरेगा से जुड़ा है, जहाँ छुट्टी के दिन भी जिहादी कागजी मजदूर पसीना बहा रहे थे। आखिर क्या है यह पूरा मामला, देखिए इस रिपोर्ट में।
रुड़की के विकास खंड में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी बानगी ग्राम खड़खड़ी, नन्हेड़ा अनन्तपुर, सफरपुर और भारापुर में देखने को मिली। आरोप है कि राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर, जब हर सरकारी विभाग में अवकाश होता है, वहां मनरेगा का काम धड़ल्ले से जारी दिखाया गया।
NMMS (National Mobile Monitoring System) पर बाकायदा मजदूरों की हाजिरी भरी गई। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी।
सवाल उठता है कि बिना काम किए सरकारी बजट को ठिकाने लगाने की तैयारी कैसे की जा रही है राष्ट्रीय अवकाश के दिन भी नियमों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाई गईं।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि मौके पर न तो कोई काम हुआ और न ही कोई श्रमिक पहुंचा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर मजदूर नहीं थे, तो NMMS ऐप पर उनकी फोटो और हाजिरी किसने और कैसे अपलोड की? क्या यह बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के संभव है?
इस पूरे मामले ने जब तूल पकड़ा, तो विभाग में हड़कंप मच गया। रुड़की की BDO सुमन कुटियाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया है।
BDO रुड़की ने बताया कि यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। इसकी पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जाएगी। जो भी ग्राम विकास अधिकारी, रोजगार सहायक या कर्मचारी इसमें लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी
अब देखना यह होगा कि क्या जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या वाकई उन ‘सफेदपोशों’ पर गाज गिरेगी जिन्होंने राष्ट्रीय पर्व के दिन भ्रष्टाचार का यह काला खेल खेला।


















































